पुलिस चाहे तो इस 'हत्यारे' को महज 24 घंटे में सलाखों के पीछे डाल दे, लेकिन..
Source: रविन्द्र कुमार | Last Updated 08:42(09/02/12)
धनबाद। सुरेश हत्याकांड के दो महीने बाद भी धनबाद पुलिस मुख्य आरोपी शशि सिंह के बारे में कुछ पता नहीं लगा पाई है। हमने पुलिस की पड़ताल का जायजा लिया। भास्कर टीम की केवल दो दिनों की मेहनत में शशि के उन नंबरों का पता चला, जिनसे वो लगातार अपने नजदीकियों और उन अफसरों से संपर्क में है, जो उसका धंधा संभाले हुए हैं। इसी तरह पुलिस नोटिस के बाद भी थाना न पहुंचने वाले रामधीर व संजीव सिंह भी करीबियों से संपर्क में हैं और उनका धंधा पहले की तरह चल रहा है।
कुशीनगर में है शशि
शशि का नया ठिकाना कुशीनगर है। कुशीनगर में सरकारी उपक्रम का एक गेस्ट हाउस है। काफी फेमस गेस्ट हाउस। शशि का इसी गेस्ट हाउस में आना जाना है।
कुशीनगर ही क्यों : शशि कुशीनगर में इसलिए है क्योंकि यहां से नेपाल और बिहार की सीमा करीब है। जरूरत पड़ी तो शशि यहां से नेपाल भी भाग सकता है या फिर बिहार।
सुरेश सिंह हत्याकांड : कुशीनगर से धनबाद की गतिविधियों पर नजर रखे हुए है मुख्य आरोपी
पुलिस ने क्या किया
ञ्च घटना के बाद तीन बार मेंशन में तलाशी ली। खाली हाथ लौटी।
ञ्च मेंशन में संजीव और रामधारी के नाम पुलिस ने भेजी नोटिस। शशि के लिए चिपकाया इश्तेहार।
ञ्च शशि के नाम का वारंट लिया।
ञ्च बलिया में शशि की गिरफ्तारी के लिए पुलिस ने तीन बार दबिश की, गाजीपुर में एक बार।
ञ्च कुर्की का आदेश लिया। कुर्की करा ली गई।
क्या करना चाहिए था
पुलिस को इन तीनों के नंबरों को भी सर्विलांस पर लगाना चाहिए था। क्योंकि सूत्र बताते हैं कि शशि नियमित तौर पर इनसे संपर्क में है। इससे पुलिस को शशि के उस नंबर का पता काफी पहले लग जाता, जिसे आज भास्कर बता रहा है।
क्या नहीं किया
पुलिस ने शशि, रामधीर और संजीव सिंह द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे मोबाइल नंबरों को सर्विलांस पर नहीं लगाया।
शशि के गायब मित्रों को भी राहत
सुरेश हत्याकांड के बाद शशि के काफी करीबी समझे जाने वाले तीन मित्र आलोक वर्मा, प्रमोद लाला और मोनू सिंह भी शशि के साथ ही गायब हैं। पुलिस ने सुरेश हत्याकांड में महत्वपूर्ण साबित हो सकने वाली इस कड़ी को अब तक राहत दे रखी है।
नंबर सर्विलांस में डालने से क्या होता
अगर पुलिस इन तीनों आरोपियों शशि, रामधीर और संजीव सिंह के नंबर सर्विलांस पर लगाती, तो उसे आरोपियों के ठिकानों, उनके मूवमेंट के साथ उनसे जुड़ी सारी गतिविधियों के पल-पल की जानकारी पुलिस के पास होती। इसके बाद दबिश दी जाती, तो हत्याकांड में मुख्य आरोपी शशि, रामधीर और संजीव सिंह पुलिस की गिरफ्त में होते।
नहीं बच सकते अपराधी
मोबाइल और सूचना तकनीक के दौर में कोई अपराधी किसी भी कांड को अंजाम देने के बाद पुलिस की पकड़ से दूर नहीं रह सकता है। पुलिस का खुफिया तंत्र किसी भी अपराधी की पल-पल की गतिविधियों की खबर देता है, तो सर्विलांस की सुविधा अपराधी की हरेक गतिविधि की जानकारी उपलब्ध कर देता है। संदिग्ध ठिकानों से संबंधित थाना क्षेत्रों में उनके संबंधियों व नजदीकियों के फोन सर्विलांस की सहायता से कभी भी अपराधी तक पहुंचा जा सकता है। जमशेदपुर के कुख्यात अपराधी अखिलेश सिंह और संतोष गुप्ता के मामले में भी मोबाइल नंबर का सर्विलांस में डालना ही सबसे ज्यादा कारगर रहा था।
एफकेएन कुजूर, सेवानिवृत्त डीएसपी
शशि को पकड़वाओ 500रुपये पाओ
पुलिस ने शशि सिंह को पकड़वाने वाले को 500 रुपए का ईनाम देने का प्रस्ताव तैयार कर लिया है।
ऐसा क्यों : चूंकि आरोपी के फरार होने के बाद उसपर ईनाम रखे जाने का नियम है। इसलिए पुलिस परंपरा का निर्वहन कर रही है।
हासिल क्या : कोई असर नहीं होगा। ५क्क् रुपए के लिए कोई आगे नहीं आएगा।
इन नंबरों के जरिए अपनों से संपर्क
09431322099 शशि इसी नंबर का इस्तेमाल कर रहा है। इसकी मदद से वे अपनों के संपर्क में है।
07376369215 रामधीर इस नंबर का इस्तेमाल बलिया में कर रहे हैं। इसके सहारे चुनावी उद्देश्य के लिए लोगों से संपर्क कर रहे हैं। कैंपेन कर रहे हैं। पार्टी के लोगों के साथ बैठक कर रहे हैं।
09431155555 और 09835187777 संजीव दोनों नंबरों का इस्तेमाल कर रहे हैं। इन्हीं नंबरों से विधायक कुंती सिंह समेत बीसीसीएल के अफसरों के साथ संपर्क बनाकर अपने धंधे को पहले की तरह चला रहे हैं।
आगे क्या
> पुलिस बताए गए नंबरों की कॉल डिटेल के जरिए शशि के ठिकाने का पता लगा सकती है।
> पुलिस उन ठिकानों पर दबिश देकर शशि व उसके साथियों को गिरफ्तार कर सकती है।