सारंडा मसले पर पीएम से बात करेंगे रमेश

रांची।केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री जयराम रमेश ने सारंडा में लौह-अयस्क के खनन के लिए प्राइवेट कंपनियों के साथ हुए एमओयू को गंभीर मसला बताया। साथ ही इसके गलत परिणामों से प्रधानमंत्री को अवगत कराने की बात कही। रांची दौरे के क्रम में रमेश ने प्रोजेक्ट भवन में रविवार को प्रदेश के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ सारंडा एक्शन प्लान और ग्रामीण विकास योजनाओं की समीक्षा की। इसके बाद पत्रकारों से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि हाल के दिनों में नक्सली घटनाओं में आई तेजी चिंताजनक है। इसके बावजूद हम सारंडा और दूसरे नक्सल प्रभावित इलाकों में विकास की रोशनी फैलाने से पीछे नहीं हटेंगे। स्थानीय लोगों में प्रशासन के प्रति विश्वास कायम करना हमारा मकसद है। इसमें कामयाबी मिलते ही नक्सलवाद का खात्मा हो जाएगा।
केंद्रीय मंत्री ने समीक्षा बैठक के दौरान सारंडा एक्शन प्लान, मनरेगा, इंदिरा आवास योजना, पंचायत भवनों के निर्माण, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना और झारखंड ग्रामीण आजीविका मिशन सहित अन्य केंद्रीय योजनाओं की जानकारी ली। साथ ही विभिन्न विभागों की ओर से प्रस्तुत आंकड़ों को संतोषजनक बताते हुए सुधार के लिए सुझाव दिए। समीक्षा बैठक में विकास आयुक्त देवाशीष गुप्ता, ग्रामीण कार्य सचिव एसके सत्पथी, ग्रामीण विकास सचिव आरएस पोद्दार और योजना सचिव अविनाश कुमार सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।
नक्सलियों की बढ़ती गतिविधियों को बताया चिंताजनक
जयराम रमेश ने ग्रामीण विकास योजनाओं में प्रगति के लिए राज्य सरकार की सराहना की। उन्होंने कहा कि डगवेल के निर्माण में झारखंड ने देश में प्रथम स्थान हासिल किया है। एक लाख कुओं में से 78 हजार का निर्माण हो चुका है। इससे एक लाख हेक्टेयर से अधिक जमीन में सिंचाई सुविधा का विकास हुआ है। जो देश में एक रिकॉर्ड है। उन्होंने इन सभी कुओं के फोटो वेबसाइट पर अपलोड करने का निर्देश अधिकारियों को दिया। प्रदेश में 44 हजार पंचायत भवनों में से 22 हजार का निर्माण पूरा हो जाने पर भी केंद्रीय मंत्री ने संतोष व्यक्त किया। उन्होंने ऑडिट संबंधी खामियों के कारण रोकी गई मनरेगा की दूसरी किस्त को भी जल्द ही जारी करने का आश्वासन दिया।लेकिन अधिकारियों की ओर से एक लाख नए इंदिरा आवास के निर्माण के प्रस्ताव को फिलहाल स्थगित रखने को कहा।






