यहां साधु बनकर आए नटवरलाल और मौका पाते ही कर दिखाया कमाल!

धनबाद.वे गेरुआ वस्त्र पहने जीप पर सवार होकर आए। बोल बम के नारे लगाए। गांव वालों को जुटाया। यज्ञ का महत्व बताया। यज्ञ के नाम पर चंदा वसूला और मौका पाते ही फुर्र हो गए। ठगी की यह घटना शहर के भेलाटांड़ 26 नंबर में हुई। गांव वालों ने जिन लोगों की सेवा साधु-संत समझ कर की, वे नटवरलाल निकले। पूरा टोला ठगे जाने से हैरान है। निवासियों ने बताया कि 10 दिनों में उन्होंने 50 हजार रुपए का चंदा जमा किया था। पूरे रुपए उन ठगों के पास ही रखे थे। उन्होंने झंडा पूजा के लिए शनिवार का दिन तय किया था। गुरुवार से ही यज्ञ स्थल पर बांस-बल्ली गिराए जा रहे थे। यज्ञ को लेकर लोगों का आना-जाना लगा था। हर दिन की तरह लोग जब शुक्रवार सुबह मंदिर परिसर पहुंचे, तो ठगे रह गए। साधु गायब थे। वहां उनकी जीप भी नहीं थी। वे चंदा के रुपए लेकर फरार हो चुके थे। खबर पूरे इलाके में जंगल में आग की तरह फैल गई। लोग भेलाटांड़ शिव मंदिर परिसर में शाम तक इस ठगी की चर्चा करते रहे। घटना की सूचना देर रात सदर थाने को भी दे दी गई।
भेलाटांड़ में यज्ञ के नाम पर किया चंदा, वसूली कर भागे
भेलाटांड़ में 10 साल पहले यज्ञ हुआ था। इसकी जानकारी ठगों ने यहां पहुंचने के पहले हासिल कर ली थी। उन्होंने स्थानीय लोगों को 10 साल पहले के यज्ञ के बारे में बताते हुए खुद को उससे जोड़ दिया। भगवान का आदेश बताते हुए यज्ञ के नाम पर लोगों से मदद मांगी। यज्ञ का लाभ बताया और यज्ञ न करने पर हानि भी बताई।
ऐसे जुटाया चंदा
हर दिन कुछ ठग स्थानीय लोगों के साथ चंदा मांगने निकलते। वे घर-घर घूमकर यज्ञ के लिए इच्छानुसार धन का सहयोग मांगते। चंदे से मिले रुपए का हिसाब वे हर दिन स्थानीय लोगों के सामने ही करते, ताकि उनका विश्वास कायम रहे। चंदे से मिले रुपए को ठगों का सरदार हर दिन अपने पास ही रख लेता।
...और 29 अक्टूबर से होना था यज्ञ
ठगों ने यज्ञ शुरू करने की तारीख 29 अक्टूबर तय की थी। यज्ञ के लिए २२ को झंडा पूजा होना था। इसकी तैयारी चल रही थी। पंडाल के लिए बांस गिराया जा रहा था। पूजा का सामान खरीदा जा रहा था।










