अगर धरती आबा आज के झारखंड की हालत देखते तो उन्हें बेहद कष्ट होता। हम उनके सपनों का सम्मान नहीं कर पाए और न ही उसे जमीन पर उतार सके।
ऐसा क्यों हुआ? इसके लिए कौन जिम्मेवार हैं? हमारे एक्सपर्ट पैनल ने बिरसा के सपनों के आधार पर वर्तमान स्थिति का जायजा लिया और सामने आई हकीकत को आपके सामने रख रहे हैं। यह विशेष अंक धरती आबा के सपनों को ही समर्पित किया है हमने।
झारखंड स्थापना के 11 साल पूरे होने पर दैनिक भास्कर ने विशेषज्ञों की मदद से तैयार किया, दस्तावेज।
स्थापना दिवस विशेष अंक को देखने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें-
http://epaper.bhaskar.com/jarkhand/epapermain.aspx?eddate=11/15/2011&edcode=260