जानिए वासेपुर की असली और फ़िल्मी कहानी

धनबाद. 'गैंग्स ऑफ वासेपुर' का शहर वासेपुर झारखंड के धनबाद जिले का एक छोटा सा कस्बा है। कहा जाता है कि वहां रात में आठ बजे के बाद निकलना खतरे से खाली नहीं है। जब धनबाद से वासेपुर के लिए निकलते हैं तो आपको पहले ही बता दिया जाता है आठ बजे के बाद वहां मत जाइएगा। वासेपुर कोयले की खानों और इसके लिए होने वाले वहशी जुर्म के लिए बदनाम बताया जाता है।
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फिल्म की कहानी उस समय से शुरू होती है जब भारत में ब्रिटिश सरकार अपनी आखिरी सांसे गिन रही थीं। शाहिद खान लुटेरा है जो ब्रिटिश ट्रेनों को लूटता है। बाद में, वह रामधीर सिंह के कोयला खान में मजदूरी करने लगता है। जिन लोगों से उसकी पुश्तैनी दुश्मनी चल रही होती है, उनसे वह बदला लेना चाहता है। शाहिद का बेटा सरदार खान अपने बाप के अपमान का बदला लेने की कसम खाता है और वासेपुर का दबंग अपराधी बन जाता है, जिससे सभी डरते हैं और वह अपने दुश्मनों से बदला लेता है। यह कहानी सच्ची घटनाओं से प्रेरित है।
मुस्लिम बहुल्य वासेपुर को अनुराग कश्यप ने इंटरनेशनल लेवल पर एक पहचान दे दी है। लेकिन कुछ लोग इससे नाराज भी हैं। इनका कहना है कि अनुराग यहां के मुसलमानों को बदनाम करने पर तुले हैं। फिल्म के लेखक जीशान कादरी को धमकी भी मिल चुकी है। फोन पर एक शख्स ने उन्हें धमकाते हुए कहा था कि अनुराग ने फिल्म के माध्यम से वासेपुर को बदनाम किया है। यह यहां की सच्चाई नहीं है। कादरी ने जो किया, ठीक नहीं किया। अब इसके लिए उन्हें पछताना पड़ेगा। कादरी को धनबाद में घुसने नहीं दिया जाएगा। जीशान अभी मुंबई में हैं। उनका पूरा परिवार फिलहाल वासेपुर में ही रहता है।
वासेपुर के लोगों ने फिल्म को बैन लगाने की मांग की है। इस संबंध में सूचना एवं प्रसारण मंत्री अंबिका सोनी, केंद्रीय मंत्री सुबोधकांत सहाय, राज्यपाल डॉ सैयद अहमद और झाविमो प्रमुख बाबूलाल मरांडी को ज्ञापन सौंपा गया है। सामाजिक कार्यकर्ता परवेज अख्तर ने बताया कि मुस्लिम बहुल क्षेत्र वासेपुर की आबादी लगभग दो लाख है। यहां के कई लोगों प्रशासनिक पदों पर कार्यरत हैं। फिल्म में कई आपत्तिजनक डॉयलाग बोले गए हैं। यहां के लोगों को बदनाम करने की साजिश की जा रही है। कश्यप ने भी वासेपुर के बारे में कई आपत्तिजनक बात कही है।








