वाहनों में सरकारी नंबर प्लेट अभी नहीं
Source: अश्विनी रघुवंशी | Last Updated 08:54(09/02/12)
जमशेदपुर। झारखंड के वाहनों में सुप्रीम कोर्ट की तय समय सीमा में हाई सिक्युरिटी युक्त नंबर प्लेट लगना संभव नहीं दिख रहा है। दरअसल, इस नंबर प्लेट को लगाने के लिए जिस कंपनी को टेंडर दिया गया था, उसकी तहकीकात पूरी नहीं हो सकी है।
नंबर प्लेट के लिए परिवहन विभाग ने जो टेंडर निकाला था, उसमें गाजियाबाद की मेसर्स एग्रोइन प्राइवेट लिमिटेड की निविदा राशि सबसे कम थी। परिवहन आयुक्त अशोक शर्मा ने गाजियाबाद जाकर कंपनी के बारे में छानबीन की, तो पाया कि टेंडर में जो पता था, वहां दूसरी कंपनी (ट्रेडवेल) चल रही थी। हालांकि, दोनों कंपनी का मालिक एक ही व्यक्ति है। प्रथम दृष्टया फर्जीवाड़ा सामने आने के बाद झारखंड सरकार ने कंपनी के बारे में उच्चस्तरीय तहकीकात के आदेश दिए हैं। मुख्यमंत्री के निर्देश पर परिवहन सचिव, उद्योग निदेशक और नई दिल्ली स्थित झारखंड भवन के स्थानीय आयुक्त संजय कुमार की तीन सदस्यीय समिति का गठन किया गया है।
सुप्रीम कोर्ट कर रहा मॉनिटरिंग
सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 2003 में वाहनों में हाई सिक्युरिटी नंबर प्लेट लगाने का निर्देश दिया था। मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने इसके लिए 30 अप्रैल 2012 की समय सीमा तय कर दी। कोर्ट ने हिदायत दी है कि यदि समय सीमा में आदेश का पालन नहीं हुआ तो इसे कोर्ट की अवमानना माना जाएगा। ऐसे में दोषी राज्यों पर कार्रवाई हो सकती है। ऐसी स्थिति में झारखंड सरकार सुप्रीम कोर्ट को वस्तुस्थिति से अवगत कराते हुए कुछ और समय की मोहलत मांगेगी।
क्या है हाई सिक्युरिटी नंबर प्लेट
वाहनों में सरकार द्वारा अधिकृत एजेंसी द्वारा निर्धारित शुल्क लेकर हाई सिक्युरिटी नंबर प्लेट लगाया जाएगा। इस प्लेट को खोला नहीं जा सकेगा। 300 मीटर की दूरी से भी नंबर को पढ़ना संभव होगा। गृह विभाग का निर्देश है कि सरकारी नंबर प्लेट में जीपीएस सिस्टम भी लगा हो, ताकि चोरी अथवा अपराध के बाद वाहन कहां है, इसका पता चल सके।
जल्द किया जाएगा एजेंसी का चयन
परिवहन विभाग इस प्रयास में है कि जितनी जल्दी हो सके, हाई सिक्युरिटी नंबर प्लेट लगाने का काम शुरू हो। टेंडर से संबंधित वैधानिक और पारदर्शी प्रक्रिया को पूर्ण करते हुए एजेंसी का चयन जल्द कर लिया जाएगा।
अशोक शर्मा, परिवहन आयुक्त, झारखंड सरकार