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बुरी तरह फंसे दूसरे के प्रमाणपत्र पर नौकरी करने वाले
bhaskar news
| Sep 28, 2012, 07:30AM IST

यह मामला वर्ष 2007 में दर्ज हुआ था। जांच के बाद अब चालान पेश किया गया है। इस तरह से वह कई सालों तक सरकारी वेतन प्राप्त करता रहा। जांच में क्राइम ब्रांच को पता चला कि उसने जिसके कागजात का इस्तेमाल किया था उसे इस बात की जानकारी तक नहीं थी। क्राइम ब्रांच को सितंबर 2006 में विजिलेंस ने लैटर लिखा था। इसमें बताया गया था कि उनके पास एक शिकायत आई थी। जिसमें पता चला है कि एक ही कागजात पर दो लोग अलग अलग विभाग में नौकरी कर रहे है।
इनमें बलवीर सिंह पुत्र करतार सिंह निवासी चकरोई आरएस पुरा पुलिस विभाग में लगा है। जबकि दूसरा बलवीर सिंह पुत्र करतार सिंह निवासी माना आरएसपुरा अध्यापक है। इन दोनों ने एक जैसे ही शिक्षा के कागजात अपने विभागों में जमा करवाए हुए है। जांच में पाया गया कि अध्यापक ने बीएड की पढ़ाई नहीं की थी। लेकिन वर्ष 2000 में जब उसकी आरईटी टीचर की नौकरी लगी थी तो उसने उस समय पुलिसकर्मी के कागजात का इस्तेमाल किया था।
जांच में पाया गया कि पुलिसकर्मी की जन्म तिथि 30 अप्रैल 1969 है उसने बीएससी तथा बीएड की पढ़ाई की है। जबकि अध्यापक की जन्म तिथि 1 अप्रैल 1963 है। जब वर्ष 2000 में आरईटी की नौकरी का आवेदन निकला था। तो उस समय अध्यापक की आयु ज्यादा हो चुकी थी। उस समय उसने किसी तरह पुलिसकर्मी के सर्टिफिकेट की फोटोस्टेट कापी को हासिल किया। उसे जमा करवाकर नौकरी ली गई। वर्ष 2006 में वह पक्का हुआ।
उस समय जब विभाग ने उससे बाकी कागजात मांगे तो उसने अपने आप को दूसरा बलवीर सिंह बताकर अखबार में इश्तिहार दिया। जिसमें कहा गया कि उसके सभी कागजात गुम हो गए हैं। बाद में उसने शिक्षा संस्थानों को अर्जी देकर दूसरे के डुप्लीकेट कागजात प्राप्त कर लिए। उन्हें अपने विभाग में जमा करवा दिया। लेकिन विभाग के रिकॉर्ड में जन्म तिथि का फर्क आ गया।






