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मुस्लिम पुरुषों के तलाक के अधिकारों पर लागू हैं पाबंदियां

एजेंसी | Nov 02, 2012, 04:43AM IST
मुस्लिम पुरुषों के तलाक के अधिकारों पर लागू हैं पाबंदियां
श्रीनगर.   जम्मू कश्मीर हाईकोर्ट ने कहा है कि मुस्लिम पुरुषों के तलाक के अधिकार सीमाओं से बंधे हैं। असीमित नहीं हैं।
 
जस्टिस हसनैन मसूदी ने शरीयत और कुरान का हवाला देते हुए फैसला दिया है। इसमें कहा कि इनमें तलाक को अंतिम विकल्प के तौर पर माना गया है। कोर्ट ने तलाक के तीन अलग-अलग प्रकारों का जिक्र किया। कहा कि कुरान और सुन्नाह में तलाक-ए-अहसान के साथ उसके इस्तेमाल को लेकर पाबंदियां भी हैं।
 
तलाक-ए-अहसान का ऐसा तरीका है जिसे कुरान में मंजूरी दी गई है। जज ने कहा है कि यह नहीं कहा जा सकता कि यह पाबंदियां तलाक-ए-बिधि पर लागू नहीं होनी चाहिए। तलाक-ए-बिधि में पाबंदियों को सख्ती से लागू किए जाने की जरूरत है। तलाक के इस तरीके को हतोत्साहित किया जाता है।  कोर्ट ने कहा कि तलाक को अंतिम विकल्प बताया गया है। पति यह कहकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला नहीं झाड़ सकता कि उसने तलाक ले लिया है। 
 
उसे यह बताना और साबित करना होगा कि पति-पत्नी के बीच सुलह कराने के दोनों पक्षों ने प्रयास किए। लेकिन यह सफल नहीं हुए। इसके लिए वह दोषी नहीं ठहराया जा सकता। इसके अलावा उसे पत्नी से तलाक लेने का जायज कारण बताना होगा। 
 
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