श्रीनगर. जम्मू-कश्मीर की राजधानी श्रीनगर में बुधवार को हुए आतंकी हमले में सीआरपीएफ के पांच जवान शहीद हो गए और सात अन्य जख्मी हो गए। हमले में एएसआई अवध बिहारी, कांस्टेबल ओम प्रकाश, सुभाष, पेरुमल और सतीश शहीद हो गए हैं। शहीद जवान सीआरपीएफ की 73वीं बटालियन से थे। बिमना इलाके में पुलिस पब्लिक स्कूल के पास हुए इस हमले में तीन स्थानीय लोग भी जख्मी हुए हैं। सुरक्षा बलों ने दो आतंकवादियों को मार गिराया है। दोनों आतंकवादी फिदायीन हमलावर थे।
सीआरपीएफ के जवान इस हमले में घायल अपने साथियों को अस्पताल में भर्ती कराकर लौट रहे थे तो रास्ते में कुछ युवकों ने इन जवानों पर पत्थर फेंकना शुरू कर दिया। इसके बाद सीआरपीएफ के जवानों ने इन युवकों पर गोली चला दी। इस गोलीबारी में 25 साल के एक युवक अल्ताफ अहमद वानी जख्मी हो गया। बाद में इस युवक ने अस्पताल में दम तोड़ दिया। इस घटना के बाद श्रीनगर में सुरक्षा बलों के खिलाफ प्रदर्शन शुरू हो गया।
केंद्रीय गृह सचिव आर के सिंह ने कहा कि आतंकवादी लोकल नहीं थी, सीमा पार से आए थे। पहली नजर में ऐसा लगता है कि आतंकवादी पाकिस्तानी थे। गृह सचिव के इस बयान के कुछ घंटों के बाद हिज्बुल मुजाहिदीन ने हमले की जिम्मेदारी ले ली। आतंकी संगठन ने स्थानीय न्यूज एजेंसी को फोन कर हमले की जिम्मेदारी ली। कश्मीर न्यूज एजेंसी को फोन करने वाले शख्स ने खुद को हिज्बुल मुजाहिदीन का प्रवक्ता बताया। हालांकि यह खबर मीडिया में आने के बाद हिज्बुल के प्रवक्ता सैयद सलाहुदीन ने एक भारतीय पत्रकार से कहा कि उन्हें इस हमले के बारे में कोई जानकारी नहीं थी। हिज्बुल के इस दावे के बाद शक की सुई पाकिस्तान स्थित लश्कर ए तैयबा की ओर घूमती है।
पाकिस्तान की विदेश मंत्री हिना रब्बानी खार ने कहा है कि आतंकवाद से कश्मीर समस्या का हल नहीं निकलने वाला है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि मिलिट्री पावर भी इस समस्या को सुलझाने में मददगार नहीं होगी।
(फोटो: श्रीनगर में आतंकवादी हमले के दौरान जख्मी हुए साथी की मदद के लिए गुहार लगाते सुरक्षा बल के जवान। घटना की और तस्वीरें देखने के लिए आगे के स्लाइड पर क्लिक करें)