PIX : ऐसे हुआ कश्मीर का विलय, ऐसे पड़ी समस्या की नींव

अंग्रेजों के खिलाफ आजादी की लड़ाई चल रही थी। अंग्रेजों ने बांटों और राज करो की नीति को आगे बढ़ाने के लिए 1931 में लंदन में गोलमेज सम्मेलन बुलाया। सम्मेलन में कांग्रेस और हिन्दू महासभा ने आजादी की मांग की, तो अंग्रेजों ने अंबेडकर, मुस्लिम लीग और भारतीय राजाओं से अपने समर्थन की आशा की।
कश्मीर के महाराजा हरि सिंह उस समय भारतीय राजाओं की संस्था चैम्बर ऑफ प्रिंसेज के अध्यक्ष के रूप में गांधी जी के स्वतंत्रता के पक्ष में खड़े हो गए। हरि सिंह के इस स्टैंड के कारण गोलमेज सम्मेलन से अंग्रेजों की बांटने की नीति सफल नहीं हुई। हां, अंग्रेज अब कश्मीर के महाराजा से गांधी के समर्थन का बदला लेने के लिए बड़ी सिद्दत से मौके की तलाश करने लगे। (फोटो : भारत की आजादी के पहले से जम्मू-कश्मीर के भारत में विलय तक जम्मू-कश्मीर के महाराजा रहे हरि सिंह।)
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