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पीओके में रची गई साजिश, गुरू की फांसी के बाद की बैठक
अमित मिश्रा
| Feb 28, 2013, 07:26AM IST

नई दिल्ली। अफजल गुरु की फांसी के बाद नौ और 10 फरवरी को पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के मुजफ्फराबाद में यूनाइटेड जेहाद काउंसिल की बैठक हुई थी। हैदराबाद के दिलसुखनगर के धमाकों की साजिश इसी बैठक में रची गई थी। लश्कर सरगना हाफिज सईद और हिजबुल सरगना सैयद सलाउद्दीन भी इसमें मौजूद था।
इंटेलीजेंस ब्यूरो द्वारा जुटाई गई जानकारियों के मुताबिक बैठक में हूजी और जैश-ए-मुहम्मद के सरगना भी मौजूद थे। इसमें इंडियन मुजाहिदीन के भगोड़े आतंकी रियाज भटकल और यासीन भटकल को दिलसुखनगर की रेकी करके नक्शे के साथ रिपोर्ट देने को कहा गया।
ऑपरेशन की फंडिंग दुबई स्थित बशीर कैंप के जरिए हुई। धमाकों के लिए पहले 16, 19 और 20 फरवरी की तारीखें चुनी गई थीं। इस बीच खुफिया एजेंसियों को साजिश का पता लग गया और अलर्ट जारी कर दिया गया। इसलिए हमले की तारीख बदल दी गई।
बोध गया में भी की गई रेकी
रियाज और यासीन भटकल कुछ दिन पहले दुबई में बशीर कैंप के लोगों से मिले थे। ब्लास्ट करने में इंडियन मुजाहिदीन को हैदराबाद और सिकंदराबाद में हूजी के स्लीपर सेल ने भी मदद की। आतंकियों ने गया, मुंबई, चेन्नई और बेंगलुरू की भी रेकी की थी। ब्लास्ट में महाराष्ट्र के नांदेड़ मॉड्यूल का भी हाथ है। हमले को आईएम के सात-आठ आतंकियों ने अमलीजामा पहनाया।
एनआईए की छह टीम कर रही जांच
जांच के लिए एनआईए की छह टीम बनाई गई है। जेलों में बंद आईएम आतंकियों से भी पूछताछ की जा रही है। धमाके के सूत्र बिहार के दरभंगा, उत्तर प्रदेश, झारखंड, कोयंबटूर और महाराष्ट्र के नांदेड़ से जुड़ रहे हैं।
शिंदे के बयान पर घिरी सरकार
नई दिल्ली/हैदराबाद। हैदराबाद बम विस्फोट पर शुक्रवार को संसद में जमकर हंगामा हुआ। विपक्ष ने गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे को आड़े हाथ लिया। शिंदे ने सफाई दी। कहा कि हमले की खुफिया सूचना थी। राज्यों को बताया भी था। लेकिन जानकारी स्पेसिफिक नहीं थी।
विपक्ष ने एक ही सवाल किया, ‘सूचना रहने के बाद भी सरकार और पुलिस बार-बार नाकाम क्यों हो रही है?’ इससे पहले गृहमंत्री ने हैदराबाद का दौरा किया। वहां से लौटकर संसद में बोले कि ‘जांच में कुछ क्लू मिले हैं। उनके बारे में फिलहाल बताया नहीं जा सकता।’
इस बीच खुफिया सूचना मिलने के बावजूद सरकार की नाकामी पर भाजपा नेता सुषमा स्वराज ने एतराज जताया। कहा कि इस समय पूरा विपक्ष सरकार के साथ है, लेकिन जानकारी के बावजूद ऐसी घटना होने से दोष दूना हो जाता है। उन्होंने किसी का नाम लिए बिना सवाल किया कि कहीं ये घटना हाल के भड़काऊ भाषणों का नतीजा तो नहीं है?
शिंदे के मुताबिक यह हो रहा
1. रोज दो बार होती है गृह मंत्रालय में बैठक।
2. नेशनल एजेंसी सेंटर (एनएसी) भी काम कर रहा।
3. नेशनल इंटेलीजेंस ग्रिड से सभी खुफिया एजेंसियां जुड़ी हैं।
4. एनआईए के गठन और कार्रवाई से हमले कम हुए हैं।
..लेकिन एनसीटीसी का मलाल
शिंदे ने कहा कि नेशनल काउंटर टेरेरिज्म सेंटर (एनसीटीसी) नहीं होने से राज्यों से तालमेल में कमी आ रही है। उन्होंने कहा कि एनसीटीसी पर विपक्ष एकमत नहीं है, लेकिन सरकार अब भी चाहती है कि यह लागू हो।
मरने वालों की संख्या 16, घायल 117
हैदराबाद के दिलसुख नगर में गुरुवार को हुए दोहरे बम धमाके में चार और लोगों की मौत हो गई। मरने वालों की संख्या अब 16 हो गई है। शहर के विभिन्न अस्पतालों में 117 लोगों का इलाज चल रहा है। इनमें से चार लोगों की हालत गंभीर है।
विस्फोट में अमोनियम नाइट्रेट का इस्तेमाल, आईएम पर शक
मामले की जांच कर रही एनआईए ने कहा है कि बम में अमोनियम नाइट्रेट का इस्तेमाल किया गया था। मौके से बॉल बेयरिंग भी मिले हैं। साथ ही घायलों के शरीर में शीशे, नट-बोल्ट, कील भी मिले हैं। हैदराबाद में 2007 में हुए बम धमाकों में भी इन चीजों का इस्तेमाल हुआ था। उस बार भी रिमोट कंट्रोल से ही विस्फोट किया गया था।
जांच में पता चला है कि घटनास्थल पर मौजूद सीसीटीवी कैमरे काम नहीं कर रहे थे। करीब चार दिन पहले ही उनके तार काट दिए गए थे। शुरुआती जांच के मुताबिक आतंकी संगठन इंडियन मुजाहिदीन ने घटना को अंजाम दिया है।
आखिरी आतंकी हमला साबित होगा: गृहमंत्री
शिंदे ने कहा कि सरकार हर संभव कदम उठा रही है। 2008 में 10 आतंकी हमले हुए थे, पिछले साल दो हुए। साथ ही भरोसा दिलाया कि हैदराबाद ब्लास्ट देश का आखिरी आतंकी हमला साबित होगा।







