एक अंधा आदमी अपने मित्र के घर से रात के समय विदा होने लगा। मित्र ने अपनी लालटेन उसके हाथ में थमा दी। अंधे ने कहा, ‘मैं लालटेन लेकर क्या करूंगा? अंधेरा और रोशनी मेरे लिए बराबर हैं।’ मित्र ने कहा, ‘रास्ता खोजने के लिए तो आपको इसकी जरूरत नहीं है, लेकिन अंधेरे में कोई दूसरा आपसे न टकरा जाए इसलिए कृपा करके यह लालटेन आप अपने साथ रखें।’ अंधा आदमी लालटेन लेकर थोड़ी ही दूर गया था कि एक राही उससे टकरा गया। अंधे ने क्रोध में आकर कहा, ‘देखकर चला करो। यह लालटेन नहीं दिखाई पड़ती है क्या?’
- ओशो मेडिटेशन रिजॉर्ट में मैनेजमेंट सदस्य, पुणो।