बैक्टीरिया और खारे पानी से बनेगा ईंधन

महज एक बाल्टी पानी और मुट्ठी भर बैक्टीरिया से प्राप्त होगी शुद्ध हाइड्रोजन, जो भविष्य के इको फ्रेंडली इंजन को ऊर्जा देगी। गंदे पानी या अन्य ऑर्गेनिक बायप्रोडक्ट से हाइड्रोजन का उत्पादन करने के लिए माइक्रोबियल इलेक्ट्रोलिसिस सेल को महज एक या दो कण नमक के चाहिए होंगे। इस तरह तैयार ईंधन से न तो कार्बन का उत्सर्जन होगा और न ही इसके उत्पादन के लिए बिजली की दरकार होगी। इस सिस्टम से हर उस जगह हाइड्रोजन रूपी ईंधन तैयार किया जा सकेगा, जहां गंदा पानी उपलब्ध होगा या पास में समुद्र होगा।
खास है तकनीक
पेन स्टेट इंजीनियर्स द्वारा खोजी गई इस तकनीक का आधार माइक्रोबियल इलेक्ट्रोलिसिस सेल हैं। इसके पहले हाइड्रोजन के उत्पादन में बिजली की दरकार पड़ती थी। प्रोफेसर ऑफ एन्वायरमेंटल इंजीनियरिंग ब्रूस लोगान ने नदी के पानी और समुद्री पानी के मेल से ईंधन बनाने का प्रयोग भी किया है।
अनंत हैं संभावनाएं
इस तरह से ईंधन के उत्पादन की संभावनाएं अनंत हैं। समुद्री पानी, नदी के पानी और बायोडिग्रेडेबल ऑर्गेनिक पदार्थों की उपलब्धता से हाइड्रोजन का उत्पादन कहीं भी किया जा सकता है। प्रयोग में पाया गया कि इलेक्ट्रोलिसिस सेल की मदद से प्रत्येक घन मीटर पानी से 0.8 से 1.6 घन मीटर हाइड्रोजन का उत्पादन संभव है।
मूल में है यह
इन माइक्रोबियल इलेक्ट्रोलिसिस सेल में रिवर्स इलेक्ट्रो डायलिसिस की खूबी होती है। ये साफ पानी और खारे पानी की आयनिक संरचना में विभेद से ऊर्जा पैदा करते हैं।






