पिछले कुछ वर्षो में देश में प्रति व्यक्ति आय लगातार बढ़ी है, लेकिन क्या देश के साथ एक आम आदमी भी अमीर हुआ है।
सरकार ने पिछले दिनों बताया कि 2011-12 में राष्ट्रीय स्तर पर हमारी प्रति व्यक्ति आय 60,603 रुपए दर्ज की गई है। इससे पहले 2009-10 में राष्ट्रीय स्तर पर प्रति व्यक्ति आय 46,117 रुपए दर्ज की गई थी और 2010-11 में बढ़कर यह आंकड़ा 53,331 रुपए हो गया था।
यानी पिछले वर्षो में हमारी प्रति व्यक्ति आय में अच्छा खासा इजाफा हुआ है। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि क्या इससे आम आदमी को भी कुछ फायदा हुआ या यह सिर्फ आकडों की बात है। जानकारों की मानें तो बढ़ती प्रति व्यक्ति आय हमारी आर्थिक खुशहाली को तो दर्शाती है, लेकिन यदि देश में बढ़ती महंगाई की बात करें तो ये आंकड़े एक आम आदमी के लिए कोई खास उपयोगी नजर नहीं आते हैं।
यही बात 2011 जुलाई माह में पेट्रोलियम मंत्री वीरप्पा मोइली ने भी कही थी। उन्होंने कहा था कि प्रति व्यक्ति आय में बढ़ोतरी के बावजूद समाज में घोर सामाजिक और आर्थिक असमानता व्याप्त है। उन्होंने कहा था कि असमानता की यह खाई पिछले कुछ वष्रो में और चौड़ी हुई है।
इससे पहले जनवरी 2012 के अंत में केंद्रीय साख्यिकी कार्यालय ने बताया था कि देश में पहली बार प्रति व्यक्ति आय पचास हजार के आंकड़े के पार पहुंची है और हमारी प्रति व्यक्ति आय 53,331 रु. हो गई है। प्रति व्यक्ति आय यानी कि हर भारतीय की औसत कमाई का आंकड़ा पाने के लिए देश की कुल आय का भाग देश की कुल जनसंख्या से किया जाता है। यह आंकड़ा देश की समृद्धि को जांचने के लिए एक महत्वपूर्ण सूचकांक है, लेकिन एक आदमी को इससे क्या फायदा होता है, यह कई बातों पर निर्भर करता है। यानी कहा जा सकता है कि प्रति व्यक्ति आय बढ़ने का मतलब है कि देश अमीर हो रहा है, लेकिन यह स्पष्ट रूप से नहीं कहा जा सकता कि हर भारतीय अमीर हो रहा है।
आज की बिग स्टोरी में प्रति व्यक्ति आय के जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं पर एक नजर...।