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देने से बड़ा कोई और सुख नहीं

Danik bhaskar.com | Dec 09, 2012, 16:04PM IST
देने से बड़ा कोई और सुख नहीं

देने से तात्पर्य सिर्फ किसी जरूरमंद की जरूरत पूरी करने से नहीं है। इसका मतलब हर उस इंसान की मदद करने से है, जो आपके आसपास मौजूद है।




मदद किसी भी तरह से की जा सकती है, जैसे सहकमिर्यो या दोस्तों को आइडिया देना, किसी की तारीफ करना या किसी को बिजी शेड्यूल में भी समय देना। इससे दूसरों का मनोबल बढ़ता है और उन्हें हिम्मत भी मिलती है।


कुछ कम नहीं होगा




आपको यह समझना होगा कि देने से कभी कुछ कम नहीं होता है। इससे हमेशा आपको कुछ न कुछ मिलता ही है। जब आप खुद दूसरों की मदद के लिए आगे आएंगे तो दूसरे भी आपके लिए हमेशा मदद के लिए खड़े रहेंगे।




उम्मीद नहीं रखें




आप दूसरों के लिए उम्मीद की किरण बनें, लेकिन बिना किसी शर्त के। देने का सुख तभी मिल सकता है, जब आप दूसरों से कोई उम्मीद न रखें, अन्यथा आपका किया सब बेकार ही है। उदारता का भाव और प्यार ऐसी संपत्ति है, जब आप किसी को देते हैं तो उसकी वापसी असीमित होती है।




कहीं ज्यादा कीमती




आपकी छोटी-सी मदद दूसरों के चेहरे पर अपने आप मुस्कान ला सकती है। आपकी यह मदद पैसों से कहीं ज्यादा कीमती है। इससे आप भी दूसरों के प्यार के हकदार बनते हैं। वहीं, इससे आपके उदार हृदय और नि:श्छल मन का भी पता चलता है। मदद करने से आत्मीय सुख मिलता है।
 

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