खुद को हर परिस्थिति के लिए तैयार करें

मैं श्रीलंका मेंबीच होटल में रुकी। इस होटल को सुनामी से नुकसान हुआ था। तूफान में यहां के संसाधनों को भारी नुकसान पहुंचाया था जिससे लोगों को बुरी परिस्थितियों का सामना करना पड़ा।
होटल को नए सिरे से बना दिया गया लेकिन तूफान का भयंकर दृश्य लोगों के जहन में ताजा है। यह क्राइसिस थी। मगर, क्राइसिस क्या है? फादर ऑफ स्ट्रैस रिसर्च हंस सेलये कहते हैं कि हर व्यक्ति तनाव में अलग व्यवहार करता है। क्राइसिस का मतलब खराब परि-स्थितियों में लोगों की अलग प्रतिक्रिया या व्यवहारहै।
हर व्यक्ति अपनी क्षमताओं के अनुसार इन परिस्थितियों से निपटता है। इन परिस्थितियों से सफल निकलने के लिए क्राइसिस मैनेजमेंट स्किल्स आने चाहिए। आप इसे ऐसे समझ सकते हैं।
ञ्चआर्मी अफसर शांति के समय पर भी मॉक ड्रिल करते हैं? कभी सोचा है क्यों? क्योंकि वे बार-बार, लगातार खुद को तैयार करते हैं। इससे मुश्किल परिस्थितियों से निपटना आसान हो जाता है। खराब परिस्थिति से बाहर निकलने के लिए प्लान बना लें।
ञ्चमदद मांगने में संकोच न करें। पड़ोसी, ऑफिस के सदस्य और दोस्तों के साथ मिलकर मजबूत नेटवर्क बनाएं। यह मुश्किल परिस्थितियों में मददगार साबित होगा। दिमाग को शांत रखने के लिए डीप ब्रीदिंग और स्ट्रेचिंग करें। -साइकाइट्री प्रोफेसर एमआईएमएचएएनएस, बेंगलुरु।






