महिलाएं :
ऐसे में महिलाओं का मासिक धर्म अनियमित होने के साथ ही उन्हें उन दिनों काफी तकलीफ होती है। इससे हार्मोनल गड़बड़ियां भी हो सकती हैं।
एंडोक्राइन सिस्टम
तनाव होने पर मस्तिष्क यह संदेश अपने हाइपोथैलेमस नामक हिस्से को देता है। इससे किडनी के पास मौजूद एड्रेनल कॉर्टेक्स से कार्टिसोल और एड्रीनल मेडुल्ला से एपिनैफ्राइन नामक हार्मोन सक्रिय होता है। इसे स्ट्रेस हार्मोन भी कहते हैं। कार्टिसोल और एपिनैफ्राइन हार्मोन सक्रिय होने से लिवर ग्लूकोज का सामान्य से अधिक निर्माण करने लगता है।
गैस्ट्रोइंटेस्टिनल सिस्टम
तनाव के चलते भोजन प्रणाली अनियमित हो जाती है। ऐसे में भूख कम या ज्यादा लगने लगती है, जिससे जलन होने, वजन बढ़ने या घटने जैसी समस्याएं होती हैं। लंबे समय तक तनाव रहने से पाचन-तंत्र पर बुरा असर पड़ता है। आंतें भोजन में मौजूद न्यूट्रिशंस का ठीक से अवशोषण नहीं कर पाती। कब्ज की शिकायत भी हो सकती है।