बढ़ानी है अपनी याद्दाश्त तो घूमने के लिए जाएं पार्क
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| May 16, 2012, 09:24AM IST

बेक्रेस्ट्स रॉटमैन रिसर्च इंस्टीट्यूट के एक फेलो मार्क बर्मन ने कहा, "हमारे अध्ययन के मुताबिक बाग, बगीचों या जंगलों में घूमने से अवसादग्रस्त लोगों की याददाश्त में सुधार हुआ और जो व्यस्त शहरी माहौल में घूमने से होने वाले लाभों की तुलना में बेहतर था।"
बर्मन मिशिगन और स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय से भी जुड़े हुए हैं। विज्ञान पत्रिका जर्नल ऑफ अफेक्टिव डिसऑर्डर की रिपोर्ट के मुताबिक बर्मन ने हालांकि कहा कि सिर्फ घूम कर ही अवसाद से मुक्ति नहीं पाई जा सकती है और साइकोपैथी तथा औषधीय चिकित्सा की जरूरत बनी रहती है।
बेक्रेस्ट के बयान के मुताबिक बर्मन का शोध एटेंशन रिस्टोरेशन थ्योरी का हिस्सा है, जिसके मुताबिक प्रकृति की गोद में समय बिताने या प्राकृतिक दृश्य देखने के बाद लोगों की एकाग्रता बढ़ जाती है।
विज्ञान पत्रिका साइकोलॉजी साइंस में एक पूर्व प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक बर्मन ने कहा था कि स्वस्थ व्यक्ति भी यदि एक घंटे तक बाग-बगीचों में घूमे तो व्यस्त शहरी माहौल में घूमने की तुलना में उनकी याददाश्त और सतर्कता में 20 फीसदी वृद्धि होती है।





