बॉडी का ‘जहर’ क्लीन करना जरूरी
dainikbhaskar.com
| Jul 03, 2012, 11:00AM IST

अनहेल्दी डाइट, कब्ज, तनाव, दूषित पानी पीने, वातावरण में मौजूद दूषित तत्व श्वास के साथ शरीर में पहुंचने और चाय, कॉफी या अल्कोहल का अधिक सेवन करने से शरीर में विषाक्त
तत्वों का स्तर बढ़ने लगता है। ऐसे में शरीर का डिटॉक्सीफिकेशन यानी विष दूर करना बहुत जरूरी होता है।
रक्त शुद्धिकरण : शरीर में विषाक्त तत्वों का स्तर बढ़ने से शारीरिक-तंत्र गड़बड़ाने लगता है। ऐसी स्थिति में डिटॉक्सीफिकेशन रक्त के शुद्धिकरण और अंदरूनी अंगों की कार्यप्रणाली को
सुचारू रूप से जारी रखने के लिए बहुत जरूरी है।
नुकसान हैं कई : विभिन्न संक्रमणों की चपेट में आना, प्रतिरोधक क्षमता कम होना, सिरदर्द, जल्दी थकान होना, पाचन-तंत्र संबंधी गड़बड़ियां और त्वचा संबंधी विकार होने जैसे लक्षण रक्त के अशुद्ध होने का संकेत देते हैं। ऐसा इसलिए होता है, क्योंकि किडनी और लिवर विषाक्त पदार्थो को पूरी तरह से बाहर निकालने में असमर्थ होते हैं।
नैचुरल तरीका है: पानी के अलावा भी कई पदार्थ शरीर का डिटॉक्सीफिकेशन करते हैं।
नींबू: विटामिन सी से भरपूर नींबू त्वचा को जवां बनाता है। खट्टे फलों में पाया जाने वाला एल्कालिन शरीर का पीएच लेवल संतुलित रखता है, जिससे प्रतिरक्षा-तंत्र मजबूत होता है।
अदरक: अगर अधिक फैटी फूड या अल्कोहल का सेवन करने से पाचन-तंत्र गड़बड़ा रहा है तो अदरक का सेवन करें। इससे कब्ज दूर होगी और पाचन सुधरेगा।
लहसुन: यह किसी एंटीबॉयोटिक से कम नहीं है। इसमें मौजूद एलिसिन तत्व सफेद रक्त कोशिकाओं का निर्माण करता है, जो विषाक्त तत्वों से रक्षा करती हैं।
ग्रीन टी: डिटॉक्स प्लान ग्रीन टी के बिना अधूरा है। विषाक्त तत्वों को निकालने और लिवर की कार्यप्रणाली सुचारू रखने के लिए ग्रीन टी जरूरी है।






