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आप भी थ्री इडियट्स में से एक हो सकते हैं!

dainikbhaskar.com | Jul 13, 2013, 12:31PM IST
आप भी थ्री इडियट्स में से एक हो सकते हैं!
फिल्म ‘थ्री इडियट्स’ में अभिनेता आर माधवन द्वारा निभाई गई फरहान कुरैशी की भूमिका को ध्यान में रखकर इस कहानी को पढ़िए। फरहान के समान रोहतक, हरियाणा के आशीष बहल भी कॉलेज में ठीक से पढ़ाई नहीं कर पाए। उनकी पढ़ाई फरहान जैसी कठिन नहीं थी। बी.कॉम. की साधारण पढ़ाई के बाद उन्हें चार्टर्ड एकाउंटेंसी का कठिन कोर्स करना था। आशीष को आरामदेह केबिन में बैठकर किसी की आय और खर्च का हिसाब-किताब लगाना या बैलेंस शीट को जांचना पसंद नहीं था। वह इस कोर्स को करने के पक्ष में ही नहीं था। वह फोटोग्राफी करना चाहता था, पर उसके माता-पिता इससे असहमत थे। उन्होंने आशीष को हरियाणा से बाहर नई दिल्ली यूनिवर्सिटी से संबद्ध एक अच्छे कॉलेज में दाखिला दिलाया। 
 
दिल्ली में आशीष ने त्रिवेणी कला संगम में फोटोग्राफी की क्लास ज्वाइन कर ली। उसने लाजपत नगर, नई दिल्ली में कुछ शो रूम में छोटे-मोटे काम करके फोटोग्राफी क्लास की फीस और जेब खर्च जुटाया। जब अभिभावकों को इसकी जानकारी लगी, तो उन्होंने सोचा कि वह ज्यादा से ज्यादा शादी-विवाह जैसे कार्यक्रमों तक सीमित फोटोग्राफर बन जाएगा। अभिभावकों ने तमाम उम्मीदें छोड़ दीं। आशीष ने एक अन्य इंस्टीट्यूट में फोटोग्राफी का एडवांस कोर्स ज्वाइन कर लिया। १९९९ में हंसराज कॉलेज से उसकी ग्रेजुएशन की पढ़ाई रुक गई। आशीष ने बाहर जाकर लैंडस्केप फोटोग्राफी शुरू कर दी।
 
वह लश्कर, पुष्कर, केरल सहित अन्य स्थानों के मंदिरों में काफी समय गुजारने लगा। वह २क्क्५ में मेसाचुसेट्स, अमेरिका स्थित हालमार्क फोटोग्राफी इंस्टीट्यूट में १क् माह का कोर्स करने के लिए गया। इस वक्त तक उसके माता-पिता को यकीन हो गया था कि वे अपने बच्चे को किसी बात के लिए मजबूर नहीं कर सकते हैं। इधर, २क्क्६ में अमेरिका से लौटने के बाद आशीष को कॉपरेरेट असाइनमेंट मिलने लगे। जब घर में भारी-भरकम धनराशि के चैक आने लगे, तब आशीष के माता-पिता को अपने बेटे पर भरोसा हो गया। इसके बाद आशीष के जीवन में एक बड़ा अवसर आया। वह भारत में लोमोग्राफी प्रोडक्ट का एकमात्र डिस्ट्रीब्यूटर बन गया। लोमो 
कैमरों का मूल्य २क्क्क् से २५क्क्क् रुपए के बीच है। 
 
लोग फोटोग्राफी के उपकरण उस स्थिति में ही खरीदते हैं, जब कोई जानकार व्यक्ति उन्हें खरीदारी के संबंध में सलाह देता है। अच्छी सलाह से कारोबार कम हो सकता है, लेकिन उससे विश्वास पैदा होता है और आशीष ने ऐसा ही किया है। अगर कोई ग्राहक अपने लैंसों के लिए दो सकरुलर पोलाराइजर खरीदना चाहता, तो आशीष उन्हें एक खरीदने की सलाह देता था। इससे उसका कारोबार प्रभावित तो होता था, लेकिन उसकी साख भी बनती थी। 
 
इस तरह आशीष बहल की ‘फोटोवाटिका डॉट कॉम’ नामक फोटो थीम शॉप चल पड़ी। उसकी दुकान से हर माह ३५ लाख रुपए का 
बिजनेस होता है। आशीष को इंटरनेट के जरिये फोटोग्राफी से संबंधित प्रोडक्ट बेचने का आइडिया २क्११ में आया। आज उसका बिजनेस अच्छी तरह से चल रहा है। भारत के विभिन्न स्थानों से उसके पास बड़ी संख्या में आर्डर आते हैं। वह प्रत्येक कस्टमर से निजी रिश्ते बनाता है क्योंकि कस्टमर किसी जरूरत के लिए नहीं, बल्कि अपने शौक के लिए फोटोग्राफी से संबंधित प्रोडक्ट खरीदते हैं। आशीष का यह विश्वास गलत साबित नहीं हुआ कि व्यक्तिगत संबंध से कारोबार बिगड़ता है।
 
प्रत्येक ग्राहक अपने साथ एक अन्य व्यक्ति को जोड़ता है। आशीष से कोई भी उसकी शैक्षणिक योग्यता नहीं पूछता है, क्योंकि वह एक कामयाब उद्यमी है। 
 
फंडा यह है कि पढ़ाई-लिखाई में इडियट होने का यह मतलब नहीं कि आप अपनी बैलेंस शीट नहीं बना सकते हैं। यदि आपकी बैलेंस शीट और मुनाफे-नुकसान का खाता अच्छा है तो कोई भी आपकी योग्यता के बारे में नहीं पूछेगा।
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