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जिंदगी में लगातार सीखते रहना चाहिए...

dainikbhaskar.com | Sep 14, 2013, 10:16AM IST
जिंदगी में लगातार सीखते रहना चाहिए...
दूर से देखने पर वह एक स्कूल की लैबोरेट्री की तरह लगता है। लेकिन अंदर आधुनिक रसोई के सभी साजो-सामान और घरेलू उपयोग में काम आने वाला सामान रखा है। वैक्यूम क्लीनर, कुकर, इंडक्शन कुकर, वाशिंग मशीन, रोटी मेकर, फूड प्रोसेसर, फ्रूट जूस प्रोसेसर, बेकिंग मशीन, माइक्रोवेव, ब्लेंडर, मिक्सर, आदि सब कुछ है वहां। नामी कंपनियों के सभी तरह के हाउसहोल्ड प्रोडक्ट। हर प्रोडक्ट के साथ एक टेक्नीशियन भी, जो वहां आई महिलाओं को उनके बारे में बता रहा था। उन्हें इस्तेमाल करने का तरीका बता रहा था। यहां आई महिलाओं के लिए ये इलेक्ट्रॉनिक हाउसहोल्ड उपकरण नए नहीं थे, लेकिन उन्होंने इन्हें कभी इस्तेमाल नहीं किया था। इन्हें कैसे इस्तेमाल किया जाए, यही जानने के लिए वे यहां आई थीं। 
 
आप शायद अंदाजा लगा चुके होंगे कि यहां आईं महिलाएं घरेलू कामकाज करने वाली नौकरानियां हैं। ये अपने काम की प्रोफेशनल ट्रेनिंग के लिए कोर्स करने आई हैं। यह कोर्स नासिक की यशवंतराव चव्हाण ओपन यूनिवर्सिटी ने शुरू किया है। इस कोर्स के तहत प्रशिक्षण लेने वाली महिलाओं को तीन भाषाओं में बोलना सिखाया जाता है। अंग्रेजी, मराठी और हिंदी। साथ ही घरेलू उपयोग के आधुनिक उपकरणों को इस्तेमाल करना भी सिखाते हैं। निश्चित रूप से इस कोर्स का मकसद इन महिलाओं में आत्मविश्वास बढ़ाना भी है। महाराष्ट्र में घरेलू कामकाज करने वाली महिलाओं की तादाद करीब 17 लाख है। इस कोर्स की फीस सिर्फ 1,000 रुपए है, जिसे डिजाइन किया है डॉ. रूपा बोधि कुलकर्णी ने। वे नागपुर के विदर्भ मोलकारिन संगठन की अध्यक्ष हैं। महाराष्ट्र डोमेस्टिक वर्कर्स वेलफेयर बोर्ड की सदस्य भी। उन्होंने यह कोर्स 25 साल पहले तैयार किया था। लेकिन उसे लागू करने का मौका अब मिला है। इस कोर्स का अब तक परीक्षण सफल रहा है। औपचारिक तौर पर इसकी नियमित शुरुआत मुंबई, नासिक, पुणो और नागपुर में अक्टूबर से होगी। महत्व की बात है कि यह कोर्स महिला और पुरुष दोनों के लिए है। रजिस्ट्रेशन फीस महज 100 रुपए है, बाकी 900 रुपए महाराष्ट्र डोमेस्टिक वर्कर्स वेलफेयर बोर्ड की ओर से दिए जाएंगे। कोर्स करने वालों को क्लासरूम में आना अनिवार्य नहीं है। उन्हें सुविधा दी गई है कि वे सप्ताह के अंत में, छुट्टी के दिनों या जब उन्हें सुविधा हो प्रैक्टिकल ट्रेनिंग ले सकते हैं।
 
कोर्स में महत्व भी सबसे ज्यादा प्रैक्टिकल ट्रेनिंग का ही है। यहां यह बताना भी लाजमी है कि कोर्स शुरू करने से पहले पूरे राज्य में बाकायदा सर्वे किया गया। इसमेंजाना गया था कि घरेलू कामकाज करने वाले अपने पेशे में किस तरह की चुनौतियों से जूझ रहे हैं। इस कोर्स से घरेलू कामकाज करने वालों को एक और फायदा होगा। वे अब तनख्वाह के तौर पर ज्यादा पैसे मांग सकेंगे। उनकी आमदनी के साथ पेशेवर स्किल बढ़ेगी तो जाहिर तौर पर समाज में उनका सम्मान भी बढ़ेगा। 
 
आजकल ज्यादातर परिवार एकल हो चुके हैं। इनमें भी अधिकांश में पति-पत्नी दोनों कामकाजी होते हैं। उनके पास घर के कामों के लिए समय नहीं होता। उन्हें घर के कामकाज के लिए मदद की जरूरत होती है। खासकर, ऐसे पुरुष या महिला की जो उनके घरों में मौजूद घरेलू इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को आसानी से हैंडल कर सकें। और जो बात-व्यवहार में भी अच्छे हों। उनकी यह जरूरतें नया कोर्स निश्चित रूप से पूरा करेगा। उनकी अपेक्षाओं के हिसाब से घरेलू कामकाज करने वाले पुरुष और महिलाओं को तैयार करेगा। इससे दोनों पक्ष लाभ में रहेंगे।
 
 

फंडा यह है कि..
 
सीखने का कभी अंत नहीं होता। न तो किसी काम में और न किसी पद पर पहुंचकर। अगर आप अपने आपको अपग्रेड करते रहते हैं तो आपकी तरक्की भी लगातार होती रहेगी। 

 

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