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अगर आप हकदार हैं तो दुनिया मदद करेगी..

dainikbhaskar.com | Sep 13, 2013, 12:11PM IST
अगर आप हकदार हैं तो दुनिया मदद करेगी..
पहली कहानी: जापान की टोक्यो यूनिवर्सिटी के प्रतिनिधियों ने इसी बुधवार को पटना के नामी कोचिंग इंस्टीट्यूट सुपर30 का दौरा किया। उन्होंने इसके संस्थापक आनंद कुमार से आग्रह किया कि वे अपने कम से कम दो छात्रों को उनकी यूनिवर्सिटी में अंडर ग्रेजुएट प्रोग्राम के लिए जरूर भेजें। इस मामले में बच्चों का पूरा खर्च यूनिवर्सिटी उठाएगी। इस टीम के लीडर थे हिरोशी योशीनो। वे यूनिवर्सिटी में इंडिया ऑपरेशन विभाग के डायरेक्टर हैं। उन्होंने सुपर-30 के छात्रों से बातचीत भी की। उन्होंने बताया कि यूनिवर्सिटी ऑफ टोक्यो को ग्लोबल कैंपस के तौर पर विकसित करने की कोशिशें जारी हैं। हाल में ही यहां इंग्लिश का नया अंडरग्रेजुएट प्रोग्राम शुरू हुआ है। वे चाहते हैं कि भारत से स्टूडेंट्स इसमें शामिल हों।
 
खासकर, बिहार से जो कि भगवान बुद्ध की जन्मभूमि है। जापान की विभिन्न यूनिवर्सिटीज में कई देशों के करीब 1.4 लाख छात्र पढ़ते हैं, लेकिन इनमें से भारतीय सिर्फ 500 हैं। टोक्यो यूनिवर्सिटी में 42 भारतीय पढ़ते हैं। जापान सरकार का लक्ष्य है कि अगले कुछ सालों में भारतीयों सहित अन्य सभी देशों के छात्रों की संख्या तीन लाख तक ले जाए। इस साल 100 भारतीयों को एडमिशन देने का लक्ष्य रखा है। इनमें लड़कियों को प्राथमिकता दी जाएगी। इसीलिए यूनिवर्सिटी का प्रतिनिधिमंडल सुपर-30 आया था।
 
दूसरी कहानी: मुंबई पुलिस को पता चला कि गोविंदा शहर के मर्वे समुद्र तट पर अपनी फिल्म ‘किल दिल’ की शूटिंग कर रहे हैं। यशराज प्रोडक्शंस की इस फिल्म की शूटिंग के लिए कोई औपचारिक अनुमति नहीं ली गई थी। मंगलवार को डेढ़ दिन के गणपति के विसर्जन का दिन था। बड़ी संख्या में लोग विसर्जन के लिए समुद्र तटों पर आने वाले थे। पुलिस को लगा कि अगर लोगों ने गोविंदा को शूटिंग करते हुए देख लिया तो वे बेकाबू हो जाएंगे। पुलिस ने गोविंदा से आग्रह किया कि वे अपनी शूटिंग रोक दें। लेकिन गोविंदा सहयोग करने के बजाय पुलिस वालों को धमकाने लगे। कहने लगे कि वे लोकसभा सदस्य हैं। पुलिस को उनकी इज्जत करनी चाहिए। इंस्पेक्टर को पता था कि गोविंदा अब लोकसभा के सदस्य नहीं हैं, इसलिए उसने कहा कि वे जल्द से जल्द सामान समेट लें। लेकिन गोविंदा ने मुंबई पुलिस कमिश्नर सत्यपाल सिंह को फोन लगा दिया। उनसे कुछ दूर जाकर बात की और फिर अपना मोबाइल इंस्पेक्टर को थमा दिया। दूसरी तरफ पुलिस कमिश्नर ने इंस्पेक्टर से कहा, ‘कानून के हिसाब से आपको जो कार्रवाई करना हो, कीजिए।’ इंस्पेक्टर ने जवाब दिया, ‘यस सर, थैंक यू।’ 
 
गोविंदा सिर्फ इंस्पेक्टर का जवाब ही सुन सके। खुश हो गए, इस उम्मीद के साथ कि अब वह इंस्पेक्टर उनके साथ इज्जत से पेश आएगा और उनकी बात मानेगा। लेकिन यह क्या? इंस्पेक्टर तो उन्हें धमकी दे रहा था। उसने गोविंदा और उनकी टीम से कहा, ‘जितनी जल्दी हो सके अपना सामान समेट लो। नहीं तो सबको गिरफ्तार कर लिया जाएगा।’ गोविंदा का चेहरा देखने लायक था। लेकिन वे तब भी नहीं माने। उन्होंने कई जगह फोन घुमाए। मंत्रालय में भी लगाया। लेकिन हर जगह से एक ही जवाब मिला, ‘अगर पुलिस कमिश्नर कुछ नहीं कर सकते तो हम भी कुछ नहीं कर पाएंगे।’ आखिर थक-हारकर उन्हें और उनकी टीम को वह जगह छोड़नी पड़ी। बाद में वे पूरे दिन मीडिया को यह सफाई देते फिरे कि उन्होंने जानबूझकर अपनी शूटिंग रद्द कर दी है, क्योंकि उनके घर पर पूजा है। उन्होंने यह भी कहा कि उनके और पुलिस के बीच कुछ गलतफहमी हो गई थी जो बाद में दूर हो गई।
 
 
फंडा यह है कि..
 
अगर आप हकदार हैं, पात्र हैं, तो दुनिया के न जाने किस हिस्से से आपकी मदद के लिए कोई न कोई आगे आ जाएगा ताकि आप अपना लक्ष्य हासिल कर सकें।
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