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सुहानी हो जिंदगी!

नीलम वर्मा | Dec 05, 2012, 00:12AM IST
सुहानी हो जिंदगी!
विवाह संस्कार दो जिंदगीयों को साझी शुरुआत का सौभाग्य देता है, इसलिए इसे युवक और युवती दोनों के जीवन की नई शुरुआत माना जाता है। 
 
देखा जाए तो शादी तय होते ही भावी वर-वधू के जीवन में बदलाव शामिल हो जाते हैं। दोनों को कदम-कदम पर Êिाम्मेदारियों का अहसास कराया जाता है। शादी की रस्मों के दौरान चुहलबाÊाी के ज़रिए कितनी बार बहूमूल्य समझाइशें भी मिल जाती हैं। बड़ों से मिलने वाली सीख लड़की के हिस्से में थोड़ी Êयादा ही आती है, क्योंकि उसके सामने एक नए परिवार और अनजाने परिवेश में ख़ुद को ढालने की चुनौती होती है। 
 
मश्विरे दोनों के लिए ज़रूरी हैं, कुछ शादी के दौरान और कुछ रिश्ते की निबाह के लिए। 
 
विवाह की रस्में जब चल रही होती हैं, तो सबकी निगाहें जिन्हें देख-परख रही होती हैं, वे हैं दूल्हा-दुल्हन। उनकी पलकों के उठने-झुकने से लेकर, उनकी मुस्कान, बोल सब जैसे माइक्रोस्कोप से देखे जाते हैं। इस वक़्त कम बोलना, •यादा मुस्काना बड़ा काम आता है। आपस में बात करने की यह जगह नहीं है। अभी तो मेहमानों पर ध्यान दें और रीतें समझकर निभाएं। आज आपका दिन है, सारी बातें भूलकर, सिर्फ आनंदित हों। विवाह का दिन यादगार बनाएं। फोन से तो दूर ही रहें। तस्वीरें लगातार अपलोड करने के रोमांच से परहेज़ रखें। बाद में चुनिंदा तस्वीरें ही डालें। सेलफोन से बेवक़्त चिपके रहने से जहां आप मेहमानों की अवहेलना कर बैठेंगे, वहीं ऐसी तस्वीरें भी अपलोड करने में आ जाएंगी, जिनका केवल तात्कालिक महत्व होगा, ख़ूबसूरती नहीं।
 
आप नई Êिांदगी में शुरुआत करेंगे, तब ऐसी दिनचर्या चुनिए जिसमें दोनों के लिए साझा समय हो और अलग स्पेस भी। नए जीवन से जुड़ी कठिन परिस्थितियां व फैसले, तनाव, संघर्ष और कहीं पक्षपात, इन सभी से आप दोनों का सामना होगा। इन सबके ऊपर ख़ुशी चुनना आपके हाथ में होगा। अपने साथी के साथ एक नई रीत बनाए, जो आप दोनों को और जोड़े, ख़ुशी के रास्ते भी खुल जाएंगे। सुबह और शाम की सैर तन-मन को चंगा रखेगी। एक-दूजे के प्रति विनम्र रहें। 
 
मिलकर कोई सामाजिक काम करें। रूहानी खुशी मिलेगी। अच्छे दोस्तों के साथ बिताया वक़्त और एक-दूसरे को हंसाने की सतत कोशिशें भी ख़ुशी के रास्ते खोलती हैं, चुनिए उन तौर-तरीकों को जो आपके जीवन को ख़ुशियों से लबरेÊा रखे।
नए परिवेश और परिवार में जो बात सबसे Êयादा आपकी मदद करेगी वह है- ‘चीÊाों को निजी स्तर पर न लेने की आदत।’ आप अपने आस-पास हो रही हर बात के लिए ज़िम्मेदार नहीं हैं। लोगों की परेशानी, नाराज़गी, उनका अपना मसला भी हो सकता है। ख़ुद को ज़िम्मेदार मानते हुए अपना पक्ष सामने रखने की कोशिश न करें, इससे विवाद बढ़ते हैं। सब्र रखें इंतÊार करें, मामले ख़ुद ही सम्भल जाते हैं, बशर्ते वक्त दिया जाए।
 
 इतना ही महत्वपूर्ण है, हर समय दूसरों की स्वीकृति व समर्थन की आशा न करना। तारीफ पाना, अपनी महत्ता स्वीकार कराना, अच्छा तो लगता है लेकिन इन पर अपना वजूद खड़ा करना ठीक नहीं। अपनी Êिाम्मेदारियां मेहनत और ईमानदारी से निभाकर, ख़ुद संतुष्ट और ख़ुश होना, सबसे Êयादा Êारूरी है। अपने आप को बेहतर बनाने की कोशिश में लगे रहिए। दूसरों से ख़ुद की कभी तुलना करना और प्रतिस्पर्धा करना, सिर्फ औरों की स्वीकृति पाने के लिए, आपको चिड़चिड़ा और दुखी ही बनाएगा। 
 
 
बातचीत में शब्दों का विशेष ख्याल रखें। मुंह से निकले शब्द आपके जीवन में हार या जीत दिला सकते हैं। अपना पक्ष रखना Êारूरी है लेकिन अपनी बात शांति और गरिमापूर्ण तरीके से रखें। ‘कौन ग़लत है?’ से Êयादा यह तय करना Êारूरी है कि ‘क्या ग़लत है?’ तब दलीलें, मुद्दे को ख़त्म करने के लिए होंगी, रिश्तों को ख़त्म करने के लिए नहीं। 
नवजीवन में कदम उसी तरह मज़बूती से रखने होंगे, जैसे फेरों के वक़्त रखे थे। 
 
 
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