विज्ञापन
 
 
 
 

रिश्ता रचाएं

 
Source: कीर्ती बिष्ट   |   Last Updated 11:19(08/02/12)
 
 
 
 
अपनत्व के धागे में नए रंग, नए तराने, नया जज्बा और उत्साह के मोती पिरोना, उतार-चढ़ाव भरी डगर में साथी को ताज़गी का अहसास कराना, अपने रिश्ते को सुहाना करने जैसा है। इस वैलेंटाइन्स डे पर अपने रिश्ते को नई ताज़गी का तोहफा दीजिए।


मुझे पता है..


हर रोज़, हर समय लगाव का इज़हार कहकर करना मुमकिन नहीं होता। छोटी-छोटी बातों से यह ज़ाहिर ज़रूर हो जाता है।

मिसाल के तौर पर, ‘थैंक यू’ दो ऐसे शब्द हैं, जो आपका आदर व सम्मान भाव आपके पार्टनर के प्रति दर्शाते हैं। आपकी मदद और काम करना उनका उत्तरदायित्व है, ये दिमाग से निकाल दें। आपका थैंक यू आपके पार्टनर के लिए किसी टॉनिक से कम नहीं है। कितना स्वाभाविक है परवाह करना, और कितना अच्छा अहसास है यह जानना कि दूसरे को इस परवाह की अहमियत मालूम है।


मान भी लो..

कई बार ऐसा होता है, जब पार्टनर ठानकर बैठ जाता है कि ‘मैं ही क्यों’ बोलूं। गलती यदि आपने की है, तो उसे स्वीकारें। अहं में डूबकर अपने रिश्ते को मज़बूती देने की बात भूल जाइए। छोटी-छोटी भूलें या गलतफहमियां अगर छोड़ी न जाएं, तो किसी दिन बड़ा बोझ भी बन सकती हैं। दिन-भर में जो कुछ भी चुभता रहा हो, उसे शाम को बात करके खत्म कर लें। ये हल्कापन दाम्पत्य जीवन के लिए वरदान है। आपसी समझाइश बढ़ेगी।

खेल हो जाए

बड़े तो आप हैं हीं, तो कभी-कभी बच्चे बन जाएं। इंडोर-आउटडोर दोनों तरह के खेल आज़माइए। घर में हाइड एंड सीक खेलें। पार्क जाकर बास्केट बॉल पर दो-दो हाथ कर लें। या फिर राइड्स के शौकीन हैं, तो एम्यूज़मैंट पार्क जाने का प्लान बनाइए। खुलकर चिल्लाइए और मस्ती कीजिए। यदि हम चाहें, तो बचपन की याद करने के बजाय उन्हें फिर से जी सकते हैं। बस ‘बच्च’ बनने की देर है। रिश्तों में जो तयशुदा भूमिका होती है, उसमें थोड़ा गाम्भीर्य ओढ़ना पड़ता है। खेल-कूद, मस्ती करने से उस जकड़न से आज़ादी मिल जाती है।



रिश्ते की फिटनेस..

फिटनेस की परवाह करना, सेहतमंद रहना और साथी को समय देना- यह सब मुमकिन है, अगर साथ ही किसी जिम या योग क्लास में जाया जाए। करके देखिए, इससे आपकी ही नहीं, रिश्ते की फिटनेस भी दुरुस्त रहेगी।

खुद बनें आईना


कभी-कभी आपके बोल सामने वाले को आहत कर सकते हैं। हमें अहसास होना चाहिए कि हमारे शब्दों और भावों का सामने वाले पर क्या असर पड़ सकता है।


अगर आपको कोई महत्वपूर्ण मुद्दे पर बात करनी है, या कोई ऐसा संवाद होना है, जिसमें बात को सम्भालकर कहना है, तो एक बार प्रैक्टिस कर लीजिए। आपकी बात में शब्द चयन और लहज़ा दोनों ही अहम होंगे। हम अक्सर ‘तुम हमेशा ऐसा सोचते हो।’, ‘तुम कभी भी नही करते।’, ‘मेरी ज़रूरत नहीं।’ जैसे वाक्य बोल जाते हैं, जिसका असर लम्बे अरसे तक बना रहता है। ये सभी बातें हम तैश या फिर गुस्से में बोल जाते हैं, लेकिन ये हमारे रिश्ते को बोझिल बना सकता है। इसलिए पहले खुद से बतिया लें। आईने के साथ-साथ आप अपनी आवाज़ रिकॉर्ड करके भी सुन सकती हैं। ऐसा लगातार करेंगे, तो आपके बात करने का ढंग प्रभावी बनता जाएगा।
 
 
 
अगली खबर
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
आपके विचार

 
 
कोड :
10 + 1

 
 
विज्ञापन
 

बड़ी खबरें

 
 
 
 
 
 
 
 
 

रोचक खबरें

 
 
 
 
 
 
 
 
 

बॉलीवुड

 
 
 
 
 
 
 
 
 

जीवन मंत्र

 
 
 
 
 
 
 
 
 

क्रिकेट

 
 
 
 
 
 
 
 
 

बिज़नेस

 
 
 
 
 
 
 
 
 

जोक्स

 
 
 
 
 
 
 
 
 

पसंदीदा खबरें

 
 
 
 
 
 
 
 
 

फोटोगैलरी

Most Viewed

ट्विटर पर जिस्म -2
रेड हॉट
Just Added

'राउडी राठौर'
Unveiling Victoria's latest collection
 
 
 
विज्ञापन
 
 
| Email  Print Comment
| Email  Print Comment