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छुपी परवाह और मुखर स्नेह

नीलम वर्मा | Apr 04, 2012, 17:29PM IST
 
 

तोहफा यानी अपनेपन और आश्चर्य में लिपटी खुशी। तकनीकी रूप से तोहफे का मतलब होता है, किसी इंसान या मौके को सम्मानित करने के लिए दी जाने वाली चीज, जिसके बदले में आप कोई आशा नहीं रखते। एक तोहफा कह सकता है, ‘मुझे तुम्हारी परवाह है।’ या ‘मुझसे गलती हुई है, माफ कर दो।’ या फिर और भी बहुत कुछ।

तोहफा दो चीजों तयशुदा तौर पर बताता है, एक तो यह कि आपको किसी ने इस लायक समझा और दूसरा यह कि कितना लायक समझा। यानी किसी भी रिश्ते की गहराई नापता है दिया हुआ उपहार। इसका तोहफे की कीमत से कोई सम्बंध नहीं है।

मन से दिया गया उपहार कहता है- ‘मुझे आपकी अहमियत पता है।’ ‘समझा है मैंने आपको।’ और लापरवाही से दिया गया तोहफा ठीक यही दर्शाता है, ..आपकी लापरवाही उस रिश्ते, उस इंसान के प्रति जिसे आपने तोहफा दिया। जाहिर है, गिफ्ट्स रिश्ते बना या बिगाड़ भी सकते हैं।

बात गहरी है, समझें जरा.. क्च तोहफे का मौका- सबसे पहले तो यह समझ सकते हैं कि चाहे जब-तब गिफ्ट देने से, एक तो गिफ्ट पाने का रोमांच जाता रहता है, फिर लोग भी आपसे हर समय
आशा लगाए रहते हैं और एक अकृतज्ञ रवैया अख्तियार कर लेते हैं। बाद में शिकायत करना बेमानी है! क्च खुशी से है नाता- तोहफों के आदान-प्रदान में यह नियम कि सिर्फ बड़े देंगे और छोटे लेंगे, निहायत बेतुका
है। तोहफा पाना, सभी को अच्छा लगता है। क्च तोहफे महिलाओं को- कृपया कुछ ऐसा न दें, जो किचन या घर के उपयोग की वस्तु हो। महिलाओं की भी अपनी कई जरूरतें होती हैं, इस बात को ध्यान में रखते हुए गिफ्ट देंगे, तो बेहतर होगा।

ध्यान रखें कि जरूरी नहीं कि हर महिला को गुलाबी रंग की या फेमिनाईन चीजों ही अपील करती हों। ओवर साईज शर्ट, कार ड्राइविंग लोफर्स (जूते) से लेकर स्मार्ट बैग्स तक वे पसंद करती हैं। तोहफे पुरुषों के लिए- यह भी जरूरी नहीं है कि पुरुषों को फेमिनाईन चीजों से एलर्जी ही हो। आजकल तो ज्वैलरी पुरुषों की भी खास पसंद है। ऐसे तोहफे चुनें, जो व्यवहारिक होने के साथ ही सबसे जुदा भी हों। जैसे टेह्रश्वस को एमपीथ्री में, बिना पीसी के बदलने की मशीन या गुमी चाबी को ढूंढ निकालने वाला कीरिंग, जो सीटी के जवाब में आवाज करता है।

ऐसी चीजों को आसानी से ऑनलाइन भी ऑर्डर किया जा सकता है। कृपया पर्सनल हाइजीन की चीज, जैसे डियो आदि गिफ्ट देने से बचें। इनका गलत अर्थ प्रतीत होता है। बुजुर्गो के लिए- इस उम्र में मन अध्यात्म में रमता तो है, पर इसका मतलब यह तो नहीं कि इन्हें सिर्फ रुद्राक्ष की मालाएं, छड़ी और धार्मिक साहित्य ही दिया जाना चाहिए। बुजुर्गवार के लिए उनका पसंदीदा व्यंजन बनाकर ले जाएं। बाजार में मिलने वाली तरह-तरह की मैगीन का हैम्पर बनाकर दें।

व्यवहारिक लगे तो, एक बोल में मछली का जोड़ा दे सकते हैं। यह देख लें कि ऐसा प्राणी ही दें, जिसकी देखभाल बुजुर्ग आसानी से कर सकें। बच्चों के लिए- ऐसे खिलौने हरगिज न दें, जो बेज आवाजों करते हैं। ज्यादा सेल की खपत वाले खिलौने भी परेशानी का सबब बनते हैं। बर्थ-डे पार्टी में केक खरीदकर ले जाने का Êिाम्मा ले सकते हैं।

या फोटोग्राफर की अहम भूमिका निभा सकते हैं। ध्यान रखें!! क्च रुमाल को फेयरवेल गिफ्ट माना जाता है, जिससे अलविदा कह रहे हों, उसे ही दें। क्च टॉवेल अक्सर कुछ उन मौकों पर दिया जाता है, जो दुखद होते हें। इसलिए इन्हें भी न दें। क्च घड़ियां, यह दर्शाती हैं कि समय खत्म हो रहा है धीरेधीरे। चाइनीज सभ्यता में इन्हें भी अच्छा तोहफा नहीं माना जाता। क्च तीखी, नुकीली या छेद वाली चीÊों (जैसे रसोई का पलटा आदि) भी तोहफे में नहीं दी जातीं। सफेद या काली चीÊाों से भी परहेज करें। गिफ्ट देने से पहले याद से प्राइज टैग हटा दें।


इंदौर, मध्यप्रदेश
 
 
 

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