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उलझन : मैं दोराहे पर खड़ी हूं।

 
Source: खुशबू शर्मा   |   Last Updated 23:43(17/08/11)
 
 
 
 
समस्या

मैं 38 वर्षीय महिला हूं और मेरे दो बच्चे हैं। बेटी नौ साल की है और बेटा तेरह का। पंद्रह वर्ष का वैवाहिक जीवन बिताने के बावजूद मेरे पति को शारीरिक सम्बंध के अलावा मुझसे अन्य कोई सरोकार नहीं है। मेरे सुख-दुख की उन्हें जरा भी फिक्र नहीं है। मैं और मेरे पति शासकीय विभाग में कार्यरत हैं, इसलिए शुरू से ही हम अलग-अलग शहरों में रह रहे हैं। बच्चे मेरे साथ रहते हैं और पति अपने संयुक्त परिवार के साथ। वहां के एकमंदिर के पुजारी भी हैं, इसलिए इस बात की आशंका नहीं है कि उनके किसी अन्य महिला से सम्बंध हों।

सप्ताहांत में पति मुझसे और बच्चों से मिलने आते हैं और अपनी इच्छानुसार काम करके और अपनी संतुष्टि करके चले जाते हैं। गृहस्थी और बच्चों की सम्पूर्ण जिम्मेदारी सिर्फ मुझपर है। मैं बहुत अकेली पड़ जाती हूं। उसके उदासीन और लापरवाही पूर्ण रवैए से मैं इतनी आहत हूं कि कई बार लगता है कि अब साथ जिंदगी बिताना हमारे लिए सम्भव नहीं हो सकता, लेकिन मैं अपने नाम के साथ तलाकशुदा शब्द जुड़ने नहीं देना चाहती। बच्चों के भविष्य की भी चिंता है।

इसके अलावा पिछले कुछ समय से मैं अपने एक पुरुष सहकर्मी से भावनात्मक रूप से काफी जुड़ चुकी हूं। उनके और उनकी पत्नी के बीच अलगाव की स्थिति दाम्पत्य जीवन की शुरुआत से ही बनी हुई है। उनका तेरह साल का एक बेटा है। हम दोनों बहुत अच्छे दोस्त हैं। वे मेरी सभी समस्याओं को दूर करना चाहते हैं और मुझसे प्रेम करते हैं। क्या शादी के इतने सालों बाद तलाक लेकर मेरा उस पुरुष सहकर्मी से पुनर्विवाह करना उचित होगा? क्या हमारे बच्चे इस रिश्ते को स्वीकार कर पाएंगे? कृपया राह दिखाएं।
खुशबू शर्मा,उज्जैन, मध्यप्रदेश

सलाह

डॉ. रीना राजपूत (मनोविशेषज्ञ)
भोपाल, मध्यप्रदेश


खुशबू जी, आप स्वयं मानती हैं कि आपके पति के किसी अन्य महिला से सम्बंध नहीं हैं और वे समय-समय पर आप लोगों से मिलने आते रहते हैं। इससे जाहिर है कि आपके पति को आपकी और बच्चों की परवाह है। आपके बताए अनुसार लगता है कि आपके पति अंर्तमुखी स्वभाव के हैं। ऐसे लोग अपनी भावनाओं को शब्दों के जरिए बयान नहीं कर पाते। इसलिए पहल आपको करनी होगी। शांति और संयम से काम लें। पति के साथ संवाद का रिश्ता मजबूत बनाइए।

सप्ताहांत में वे घर आएं, तो उन्हें समय दें। कुछ उनकी सुनें, कुछ अपनी कहें। देखें कि आपकी बातों में सिर्फ शिकायतें शामिल न हों। इससे आप दोनों के बीच भावनात्मक रिश्ते की डोर मजबूत होगी और आप एक-दूसरे को Êयादा बेहतर समझ पाएंगे। इसके अलावा सही समय देखकर पति से अपनी समस्या बांटें।

उन्हें समझाएं कि अकेले बच्चों और घर की जिम्मेदारी का निर्वाह आपके लिए मुश्किल है, इसलिए आपको उनका सहयोग चाहिए। आप छुट्टी लेकर कुछ दिन अपने ससुराल रहने भी जा सकती हैं। वहां आपको पति का साथ मिलेगा, भरे-पूरे परिवार के बीच आप अकेलापन महसूस नहीं करेंगी और बच्चों को भी सबसे मिलकर अच्छा लगेगा।

आपका फैसला, बच्चों की दिशा

आपके बच्चे युवा हो रहे हैं। पिता हमेशा साथ नहीं होते, इसलिए उन्हें आपके भावनात्मक सहयोग की सबसे ज्यादा जरूरत है। ऐसे में दूसरे व्यक्ति के प्रति आपका आकर्षण आपके परिवार को बिखेर सकता है। बच्चे खुद को असहज महसूस करेंगे, जिससे उनका विकास और आत्मविश्वास प्रभावित होंगे। बच्चों को भरपूर समय दें। ध्यान रखें कि आपके और पति के बीच वैचारिक मतभेदों का उन पर नकारात्मक प्रभाव न पड़ने पाए।

आपके दूसरी शादी करने पर बच्चों पर विपरीत प्रभाव पड़ सकता है। ऐसे में उनके व्यवहार और प्रदर्शन में नकारात्मक असर दिखाई देना स्वाभिक है। सम्भव है कि ऐसे में वह लोगों से बातें करना, घुलना-मिलना छोड़ दें। ऐसे बच्चों के अवसाद से घिरने की शिकायतें भी अक्सर सामने आती हैं।
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
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