विज्ञापन
 
 
 
 

बेटी है, तो सावन है!!!

 
Source: रचना समंदर   |   Last Updated 12:09(10/08/11)
 
 
 
 
जिन घरों में बेटियों का स्वागत होता है, वो भले कम हों, पर उनके घर में ऐसी ही पुकारें सुनाई देती हैं। किसी की बेटी, किसी की बहन और पूरे कुनबे के लिए समृद्धि का वरदान। एक नन्ही-सी जान और कितनी ज़िम्मेदारियां, कितनी भूमिकाएं।

पालने के पास आए भाई को सब कहते हैं, देख बेटा, इसकी रक्षा करना। तू भैया है इसका। बेटी आते ही सबकुछ जोड़ लेती है अपने लिए। बाबुल, मैया, रक्षक भैया सबकी नियुक्ति तुरंत हो जाती है। बेटे के नहीं, केवल बेटी के होते हैं बाबुल। माई से जुड़ता है मायका, जो इस पृथ्वी पर सिर्फ बेटी के नाम लिखा गया है।

बेटियां नाम और रिश्तों से ही नहीं, रहन-सहन से भी खास होती हैं। ज़रा-सा बड़ी हुईं नहीं कि उनके कानों में बालियां आ जाती हैं और पैरों में पायल। हर मेले में ढूंढी जाती हैं, उनके छोटे-से हाथों के लिए चूड़ियां। बेटी आंगन में डोले, तो हर दिन ही त्योहार लगता है। ऐसे में त्योहारों वाले मौसम में बिटिया ही घर न हो, तो कैसे झूले और कैसा सावन?

बहन बड़ी हो या छोटी, रक्षासूत्र जब बांधती है, तो हर भाई उसे शीश नवाता है। चरण छूता है। उसी की वजह से तो भाई ज़िम्मेदार बना। किसी की रक्षा के लायक माना गया। मस्तक पर स्नेह की तिलक पताका और कलाई पर अटूट बंधन के धागे पर्याप्त हैं सबसे मज़बूत रिश्ते की घोषणा करने में। दुनिया में कहीं नहीं होता इस नाते का ऐसा उत्सव। बेटी बिना आंगन और भाई की कलाई दोनों सूने रह जाते हैं।
सच कहें, तो बेटी बिना यह जग भी सूना रह जाएगा। बेटियों को न्यौता दीजिए.. बेटियों का स्वागत कीजिए।
 
 
 

 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
आपके विचार

 
 
कोड :
2 + 7

 
 
विज्ञापन
 

बड़ी खबरें

 
 
 
 
 
 
 
 
 

रोचक खबरें

 
 
 
 
 
 
 
 
 

बॉलीवुड

 
 
 
 
 
 
 
 
 

जीवन मंत्र

 
 
 
 
 
 
 
 
 

क्रिकेट

 
 
 
 
 
 
 
 
 

बिज़नेस

 
 
 
 
 
 
 
 
 

जोक्स

 
 
 
 
 
 
 
 
 

पसंदीदा खबरें

 
 
 
 
 
 
 
 
 

फोटोगैलरी

Most Viewed

ट्विटर पर जिस्म -2
रेड हॉट
Just Added

'राउडी राठौर'
Unveiling Victoria's latest collection
 
 
 
विज्ञापन
 
 
| Email  Print Comment
| Email  Print Comment