मेरा घर न बिखरे.. (सुनीला, उज्जैन, मध्यप्रदेश)
मेरी उम्र 48 वर्ष है। मेरे पांचों बच्चे बड़े और समझदार हैं, लेकिन पति पिछले 8-9 सालों से अपने एक मित्र के बहकावे में आ गए हैं और वे परिवार को छोड़ने को तैयार हैं। मैं उनके ऐसे व्यवहार का कारण नहीं समझ पा रही हूं। उनसे पूछा, यदि आपसे कोई गलती हुई है, तो मुझे बताइए। बच्चे भी उनका साथ देने को तैयार हैं पर कोई हल नहीं निकला। पति का नाम अन्य स्त्रियों के साथ भी जुड़ चुका है, लेकिन बच्चों की खातिर मैं चुप रही। रुपए घर में देने के बजाय वे बाहर ही खर्च कर देते हैं। जब पैसे मुझे देने की बात आती है, तो कहते हैं चोरी करके लाऊं क्या!! हमेशा कहते हैं कि उन्हें मुझसे कोई रिश्ता नहीं रखना। मैं क्या करूं?
आपको अधिकार है.. (बनवारी लाल विजय, दौसा, राजस्थान )
सुनीला जी, आप अधीनस्थ न्यायालय में भरण-पोषण के लिए एक प्रार्थनापत्र प्रस्तुत करें, जिससे न्यायालय आपके और बच्चों के भरण-पोषण हेतु आपके बैंक के खाते में उनकी (आपके पति) सैलरी में से सीधे काटकर पैसा आता रहेगा। इससे आप लोगों का गुजारा आसानी से चल सकेगा। जब आपके पति को मिलने वाली राशि कम हो जाएगी, तो वे अन्य लोगों की मदद भी नहीं कर पाएंगे। सम्भव है, ऐसे में वह दोस्त भी उनका साथ छोड़ दे और आपके पति को गलती का अहसास हो जाए।
संवाद की सीढ़ी (एम. शकील, जयपुर, राजस्थान )
सुनीला जी, आपके पति का चरित्र ठीक नहीं रहा, इसकी आप जिम्मेदार नहीं, लेकिन आपने चुप रहने की गलती जरूर की है। आपको पहले ही पति को समझाना चाहिए था। उनके बर्ताव से आप दोनों के रिश्ते और बच्चों के भविष्य पर बुरा असर पड़ेगा। अब बच्चों को विश्वास में लें और पति से दो टूक बात करें। साथ ही पति को यह भी जताएं कि भविष्य में कोई भी मुसीबत आने पर केवल परिवार ही उनका साथ देगा। आप परिवार के विश्वसनीय की मदद भी ले सकती हैं। यदि आपके पति किसी रिश्ते में फंसे हुए हैं, तो कानूनी पक्ष समझकर उससे निकलने में उनकी मदद करें। इस तरह आप उनका विश्वास जीत पाएंगी।
नई उलझन
मुश्किल हो गई है जिंदगी..नमिता ( परिवर्तित नाम)
मैं 25 वर्षीय विवाहिता हूं। परिवार की सहमति से मेरा विवाह आठ वर्ष पूर्व कर दिया गया था। मेरा ढाई साल का बेटा है। विवाह के पूर्व मेरे एक व्यक्ति के साथ प्रेम सम्बंध थे, जिसके बारे में परिवार को जानकारी नहीं थी। वे दूसरी जाति से हैं और परिवार हमारे रिश्ते को कभी नहीं स्वीकारता इसलिए आए हुए प्रस्ताव को नियति मानकर मैंने विवाह कर लिया।
बाद में मुझे पता चला कि पति मुझसे 10 साल बड़े हैं। मेरे और उनके बीच का फर्क विचारों में भी झलकता है। फिर भी कई बार मैंने पति और उनके परिवार के साथ आत्मसात करने की कोशिश की, लेकिन मैं अपने प्रेम सम्बंधों को समाप्त नहीं कर पाई। यह बात पति व उनके परिवार को पता चली, तो उन्होंने मेरे मायके पक्ष से बात की।
दोनों पक्षों ने मुझे हिदायत दी कि मैं अपने प्रेम सम्बंध खत्म कर दूं। मैंने अपने प्रेमी से सारे नाते तोड़ भी लिए थे। फिर बेटे के जन्म के बाद सोचा कि शायद अब ससुराल में मेरा मन लगे, लेकिन कई कोशिशों के बावजूद मैं मन से पति को स्वीकार नहीं कर पाई हूं।
हमारे बीच का वैचारिक अंतर मुझे कचोटता है। प्रेमी से दूर रहने के दौरान बार-बार उसकी याद आती थी। मैं बहुत निराश हो गई थी, आत्मविश्वास भी खो दिया था। आत्महत्या का विचार भी आया। विवश होकर कुछ माह पूर्व मैंने प्रेमी से पुन: सम्पर्क किया, वे आज भी मुझे अपनाना चाहते हैं।
हमारे बीच कभी शारीरिक सम्बंध नहीं रहे हैं। मेरा उनके बिना जीना कठिन हो गया है और मैं ससुराल में नहीं रह पा रही हूं। इसके अतिरिक्त ससुराल में मुझ पर काफी पाबंदियां लगा दी गई हैं। सभी का व्यवहार मेरे प्रति कटु है।
मैं बहुत असहाय महसूस कर रही हूं। यदि हालात ऐसे ही रहे, तो लगता है कि मानसिक रूप से विचलित हो जाऊंगी। प्रेमी के पास जाती हूं, तो परिवार और समाज हमारे रिश्ते को नहीं स्वीकारेगा और पति के साथ मैं रह नहीं पा रही हूं, क्या करूं?