मुश्किल हो गई है जिंदगी..
Source: भास्कर न्यूज़ | Last Updated 03:19(07/10/11)
नमिता (परिवर्तित नाम)
मैं 25 वर्षीय विवाहिता हूं। आठ वर्ष पूर्व मेरा विवाह हुआ था। मेरा ढाई साल का बेटा है। विवाह के पूर्व मेरे एक व्यक्ति के साथ प्रेम सम्बंध थे, जिसके बारे में परिवार को जानकारी नहीं थी। वे दूसरी जाति से हैं। मेरा परिवार हमारे रिश्ते को कभी नहीं अपनाएंगे इसलिए मैंने शादी कर ली।
मेरे पति मुझसे दस वर्ष बड़े हैं। मेरे और उनके विचार नहीं मिलते। फिर भी मैंने कई बार पति और ससुराल वालों के साथ आत्मसात करने की कोशिश की, लेकिन मैं अपने प्रेम सम्बंधों को समाप्त नहीं कर पाई। ससुराल पक्ष को यह बात पता चलने पर उन्होंने मेरे मायके में बता दिया।
दोनों पक्षों ने मुझे हिदायत मिली कि मैं यह सम्बंध खत्म कर दूं। मैंने पूरी कोशिश की, लेकिन मैं मन से अपने पति को स्वीकार नहीं पा रही हूं। हमारे बीच का वैचारिक अंतर मुझे कचोटता है। प्रेमी से दूर रहने के दौरान बार-बार उसकी याद आती थी।
विवश होकर कुछ माह पूर्व मैंने प्रेमी से पुन: सम्पर्क किया, वे आज भी मुझे अपनाना चाहते हैं। हमारे बीच कभी शारीरिक सम्बंध नहीं रहे हैं। मैं ससुराल में नहीं रह पा रही हूं। अब ससुराल पक्ष ने मुझपर पाबंदियां भी लगा दी गई हैं। मैं क्या करूं? किस ओर जाना उचित होगा?
नई शुरुआत की तैयारी..
नमिता जी, इस शादी के लिए आप ही सहमत हुई थीं, इसलिए कोई और दोषी नहीं है। यदि आप किसी और को चाहती थीं, तो शादी से पहले ही अपने घरवालों को उसके बारे में बताना चाहिए था। आपने पहले सबको अंधेरे में रखा और अब कह रही हैं कि आपका मन नहीं लग रहा, तो यह सही नहीं है न! बात रही पाबंदियों की तो वे सिर्फ आपको प्रेमी से मिलने से रोकने के लिए हैं। अच्छा यही होगा कि आप प्रेमी और अन्य पुरानी बातों को भूलकर पति व बच्चे के साथ एक नए जीवन की शुरुआत करें।
विशान सिंह डाबी, जोधपुर, राजस्थान
बेटे के बारे में सोचें..
आपने खुद ये समस्या खड़ी की है। यदि अपनी शादी के वक्त ही आपने प्रेमी को भी उसका घर बसाने को कह दिया होता, तो आज आप दो नावों पर सवार न होतीं। आपके पति से वैचारिक मतभेद और ससुराल वालों के व्यवहार कटु होने के पीछे मुख्य वजह यही है कि आपके विचारों में आज तक प्रेमी की छवि बसी है और आपका उससे रिश्ता कायम है। लेकिन इस रिश्ते के लिए अपने ढाई साल के बेटे और आठ वर्षो के वैवाहिक जीवन को ताक पर रखना क्या आपको उचित लगता है? बेटे को जो प्यार उसके पिता से मिलेगा, वो किसी और से नहीं। प्रेमी से शादी करने को कहें। साथ ही अपने पति को स्वीकारने की कोशिश करें। आपका संवाद आपके रिश्ते में मिठास जरूर लाएगा।
मेघा धालीवाल, चंडीगढ़
अपने निर्णय पर कायम रहें..
नमिता जी, जब परिवार और समाज के डर से आपने अपने प्रेम सम्बंध को त्यागते हुए नए व्यक्ति को अपनी नियति स्वीकार करने का निर्णय लिया था, तो अब अपने फैसले से पीछे क्यों हटना। आपकी पहली भूल यह थी कि आपने शादी से पहले हिम्मत कर अपने परिवार को प्रेम सम्बंध के बारे में नहीं बताया। वहीं दूसरी भूल आप आज कर रही हैं। माना कि परिस्थितियां आपके अनुसार नहीं रहीं, लेकिन फिर भी आपको अपने निर्णय पर अडिग रहना चाहिए। आप यदि प्रेमी के पास जाने का फैसला करती हैं, तो आपके बेटे पर इसका बुरा प्रभाव पड़ेगा। इसलिए बेहतर यही होगा कि प्रेमी को भूलकर अपने घर के तिनकों को जोड़ने में लग जाएं। धीरे-धीरे सबकुछ ठीक हो जाएगा।
अमर सिंह
नई उलझन..कैसे समझाऊं?
मैं 45 वर्ष एवं प्राइवेट नौकरी करता हूं। मेरी आय ज्यादा नहीं है। परिवार में पत्नी और दो बड़ी बेटियां है। पत्नी भी कार्यरत हैं। समस्या यह है कि वो जहां काम करती है, वहां के प्रमुख मेरी पत्नी पर बहुत मेहरबान हैं। वे बहाने से अक्सर मेरी पत्नी को घुमाने ले जाते हैं।
दो-तीन वर्षो में ये दोंनों ट्रेनिंग के नाम पर घर से दूर-दूर जाते रहे हैं। मुझे यह पसंद नहीं। संस्था में वे कभी किसी और को क्यों नहीं ले जाते? उन्होंने पत्नी को आने-जाने के लिए स्कूटी भी दी है। मेरी गैरमौजूदगी में वे घर पर भी आते हैं।
पत्नी से इस बारे में बात करने पर वो मुझसे लड़ती है। कहती है, तुम्हें मेरा कोई काम अच्छा नहीं लगता। मैंने कई बार पत्नी की कॉल डिटेल्स भी चेक की हैं। वो घंटों उससे बात करती है। मैं बहुत परेशान हूं। पत्नी को समझाने का भी कोई असर नहीं पड़ता। इन हालातों का असर बच्चों पर क्या पड़ेगा यह सोचकर भी चिंतित हूं। मैं क्या करूं?