प्रॉब्लम शेयर नहीं करना चाहते पुरुष
Source: भास्कर न्यूज़ | Last Updated 00:07(22/09/11)
रुचि इन दिनों अपने लाइफ पार्टनर को लेकर कुछ परेशान सी है। दरअसल हंसमुख और खुशमिजाज रमेश ने अचानक चुपचुप रहना शुरू कर दिया है। ऑफिस से आने के बाद भी वह सीधे अपने कमरे में बंद हो जाता है न किसी बोलना न चालना।
रुचि के लाख पूछने पर वह बस इतना ही कहता है कि कुछ ऑफिस की प्रॉब्लम है। मित्रो, हम बचपन से सुनते आए हैं कि दुख बांटने से कम होता है। और सिर्फ सुना ही नहीं आपने महसूस भी किया होगा कि एक दोस्त का कंधा मिलने भर से कैसे बड़ी-बड़ी परेशानियां हल्की महसूस होने लगती हैं। लेकिन पुरुषों को अपनी प्रॉब्लम दूसरों से शेयर करना टाइम खराब करना लगता है।
हम आपको यह भी बता दें कि एक ओर जहां महिलाओं को अपनी समस्याएं परिजन और दोस्तों से बांटना अच्छा लगता है और ज्यादा बात करने के लिए भले ही महिलाओं को मजाक का विषय बनाया जाता हो, लेकिन उनकी यह आदत उनके स्वास्थ्य के लिए खूब साबित होती है।
दरअसल अपनी बातें साझा करने के चलते उनके दिल का गुबार निकल जाता है और वे कई तरह की मानसिक और शारीरिक समस्याओं से बच जाती हैं। इसके उलट चूंकि पुरुषों को अपनी प्रॉब्लम दूसरों को बताना समय की बरबादी लगता है इसलिए वे मन ही मन घुटते रहते हैं।
इसका नतीजा तनाव, अवसाद और उच्च रक्तचाप जैसी बीमारियों के रूप में सामने आता है। उक्त बातें मिसौरी विश्वविद्यालय के एक शोध का नतीजा हैं जिन्हें शोधकर्ता अमांडा रोज और उनके साथियों ने 2000 किशोरों और वयस्कों पर अध्ययन करके अंजाम दिया है।
अलग-अलग शोधों से यह बात साबित हो चुकी है कि महिलाओं के मुकाबले पुरुषों में हार्ट अटैक आने की आशंका अधिक होती है। इस बात को भी प्रॉब्लम शेयर करने की पुरुषों की आदत से जोड़ कर देखा जा सकता है।
वजह:
पुरुषों द्वारा अपनी समस्याओं का जिक्र दूसरों से न करने के पीछे शोधकर्ताओं की बताई वजह के अलावा भी कई वजहें हो सकती हैं।
हो सकता है उन्हें लगता हो कि ऐसा करने से वे दूसरों के सामने कमजोर साबित हो सकते हैं।
यह भी हो सकता है कि उन्हें लगता हो कि लोग उनका मजाक उड़ाएंगे या उन पर हंसेंगे।
पुरुष होने के नाते उनमें एक तरह का सुपीरियरिटी कांपलेक्स हो सकता है जिसके चलते वे श्रेष्ठ दिखने की चाहत में अपनी समस्याओं को मन में दबाए रहते हैं।
क्या हो उपाय
बच्चों में बचपन से ही ऐसी भावना डाली जाए कि वे अपनी समस्याओं को अपने नजदीकी लोगों से शेयर कर सकें। बच्चों को कभी अकेलेपन का एहसास न होने दें। इससे उनके भीतर आत्मविश्वास का संचार होगा।