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मुआवजे का अधिकार

 
Source: bhaskar news   |   Last Updated 05:36(27/07/11)
 
 
 
 
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गलियारा
समस्या
मैं 40 वर्षीय विवाहिता हूं और न चाहते हुए भी गर्भवती हो गई हूं। मेरे दो बच्चे हैं, जो बड़े हो चुके हैं। मैंने इस गर्भ को रोकने के लिए तुरंत ही डॉक्टर की सलाह से गर्भनिरोधक गोली ले ली थीं, लेकिन कोई लाभ नहीं हुआ। इस उम्र में गर्भवती होने के कारण मैं शारीरिक और मानसिक कष्टों से गुÊार रही हूं। होने वाले बच्चे पर दवा के सम्भावित असर को लेकर आशंकित भी हूं। हमारी आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं है कि हम तीन बच्चों का खर्च उठा सकें। क्या मैं उस गर्भनिरोधक गोली बनाने वाली कम्पनी पर क्षतिपूर्ति के लिए दावा कर सकती हूं? - अनामिका गुप्ता (परिवर्तित नाम)

स्वास्थ्य सलाह
इसमें गलती आपकी भी है। आपको पहले ही गर्भनिरोध का स्थाई इलाज अपना लेना चाहिए था। अधिक उम्र में मां बनने पर होने वाली संतान का अनुवांशिक बीमारियों से ग्रसित होने का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए गर्भनिरोधक दवा का असर न हो, तो भी गर्भस्थ शिशु के स्वास्थ्य की बराबर जांच कराते रहना होगा। शारीरिक व मानसिक सेहत के लिहाÊा से भी आपके लिए इस उम्र में मां बनना ठीक नहीं होगा। इसलिए यदि गर्भधारण के बीस हफ्ते पूरे नहीं हुए हैं, तो आप गर्भपात करा सकती हैं। सरकारी अस्पताल में यह काम निशुल्क हो सकता है। लेकिन यदि गर्भधारण किए बीस हफ्तों से Êयादा समय हो चुका है, तो आपको बहुत सावधानी बरतनी होगी। ऐसे में डॉक्टर की छोटी से छोटी सलाह पर अमल करें। गर्भधारण के १६-१८ हफ्तों के बाद अल्ट्रासाउंड और ट्रिपल मार्कर टेस्ट किए जाते हैं, जिनसे शिशु की मानसिक व शारिरिक सेहत की सम्भावित स्थिति का पता लगाया जाता है। अपने डॉक्टर से इस बारे में भी राय ले सकती हैं।
- डॉ. शोभा गांधी, स्त्री रोग विशेषज्ञ, मधुरिमा पैनल ऑफ एक्सपर्ट सदस्य
कानूनी पक्ष
गर्भनिरोधक दवा लेने के बावजूद आपको लाभ नहीं मिला, इसलिए आप उपभोक्ता संरक्षक अधिनियम १९८६ के तहत दवा कम्पनी से करीब बीस लाख तक का मुआवÊा मांग सकती हैं। इसके लिए पूरी स्थिति का वर्णन करते हुए जिला उपभोक्ता फोरम में शिकायत दर्ज कराएं। शिकायत पत्र के साथ डॉक्टर का प्रिसक्रिप्शन, उस दवा का कैश मैमो, ५क्क्/- स्टेट बैंक का चालान और एक शपथपत्र भी देना होगा। चूंकि दवा लिखते वक्त आपको डॉक्टर ने यह स्पष्ट नहीं किया था कि दवा लेने के बावजूद गर्भपात न हो पाने की सम्भावना है, इसलिए आप दवा कम्पनी के साथ-साथ डॉक्टर को भी दोषी बता सकती हैं। शिकायत पत्र में डॉक्टर का नाम शामिल करने से पहले यह देखना Êारूरी है कि वह डॉक्टर प्राइवेट है या सरकारी। यदि डॉक्टर प्राइवेट है, तो अपनी शिकायत जिला उपभोक्ता फोरम में दर्ज कराएं। वहीं डॉक्टर सरकारी है, तो आपको स्थाई लोक अदालत में शिकायत करनी होगी।
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
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