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मासूम जिंदगी पर छाए, दशानन के साये

 
Source: प्रियंका शुक्ला   |   Last Updated 03:28(07/10/11)
 
 
 
 
यह तस्वीर हमारे बच्चों की जिंदगी का सच बयान कर रही है!

जाने-अनजाने में खुद ही हमने अपने बच्चों की दुनिया में रावण सहेज दिया है, जिसके साये में हमारे बच्चे महफूज नहीं हो सकते। इस रावण के दसों शीश संकटसूचक हैं। एक-एक पर गौर कीजिए।

शिष्टाचार का अभाव

बड़ों के प्रति आदर और व्यवहार में सौम्यता की सीख हम बच्चों को नहीं दे रहे हैं। यहां तक कि उन्हें नमस्ते, शुक्रिया या सॉरी जैसे साधारण लेकिन मायने समझाना भी हम भूल रहे हैं।
असर- बेअदब हो रहे बच्चे इसी भूल का नतीजा हैं।

अड़ियल स्वभाव

जिद कर अपनी हर बात मनवा लेने की कला बच्चों से सीखी जा सकती है। उनकी पहली जिद पूरी कर हम इसी व्यवहार को बढ़ावा दे देते हैं, फिर सिलसिला शुरू हो जाता है।
असर- ऐसे बच्चे नाकामयाबी स्वीकार नहीं कर पाते।

सीमाओं का उल्लंघन

बच्चों द्वारा वस्तुओं के उपभोग से लेकर पारिवारिक नियमों तक कई बार सीमाएं तोड़ी जाती हैं। सच तो यह है कि हमने ही सीमाओं की बाध्यता के महत्व से उनका परिचय नहीं कराया है।
असर- जीवन के हर पक्ष में बेकद्र हो रहे हैं हमारे बच्चे।

तकनीक पर आश्रित

हम बच्चों को कैलकुलेटर, कम्प्यूटर, मोबाइल, टीवी, वीडियोगेम जैसी तकनीकों पर आश्रित होने दे रहे हैं। नतीजतन, इन गैजेट्स के बिना बच्चों को जिंदगी मुश्किल लगती है।
असर- बच्चे अपनी योग्यता पर विश्वास नहीं कर पाते। कई बार ये गैजेट्स ही उनके स्वालम्बी होने में बाधक बनते हैं।

अनुशासन की कमी

व्यस्तता के बहाने हमने अपने जीवन के अनुशासन तोड़े और यही अनियमितताएं बच्चों पर भी हावी हो गईं। सामान को बेतरतीबी से रखने से लेकर हर काम को टालने जैसी कई बातें बच्चों के जीवन में अनुशासन की धज्जियां उड़ाने में मददगार हैं।
असर- यही बेपरवाह बच्चे कल लापरवाह वयस्क बनेंगे।

नैतिकता की कमी

अक्सर हम झूठ बोलने, रिश्तेदारों की निंदा करने जैसे कई गलत कामों में भागीदार रहते हैं। दूसरी ओर बच्चों को आदर्शो का पालन करने की शिक्षा भी देते हैं।
असर- बच्चे भ्रमित होते हैं। उनके भरोसे को ठेस पहुंचाती है।

संस्कारों की सीख

परिवार का साथ और रिश्तों का सम्मान कितना जरूरी है, ये भी हम बच्चों को नहीं समझा पा रहे हैं।
असर- टूटते-बिखरते परिवारों के किस्से अक्सर सुनाई देते हैं।

स्वच्छंद आचरण

बच्चों पर विश्वास करना और उन्हें पूर्ण स्वतंत्रता देना सही है, पर स्वच्छंद हो जाने देना उनके लिए मुसीबत का सबब बन सकता है।
असर- बच्चे महफूज नहीं हैं। वे गुमराह भी हो सकते हैं और किसी के गलत इरादों का शिकार भी।

भेदभाव के बीज

दो बच्चों के बीच आपका पक्षपाती रवैया या तुलना, बच्चे के मन में कड़वाहट के बीज बोने के लिए काफी है।
असर- बच्चे भरोसा खो बैठते हैं।
 
 
 
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