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क्यों यही रिंग फिंगर ?

 
Source: भास्कर   |   Last Updated 16:09(06/08/11)
 
 
 
 
दो लोगों को जोड़ने वाली इस चौथी उंगली के पीछे अपने तथ्य हैं, जो यह साबित कर देते हैं कि जीवनसाथी के संदर्भ में यह उंगली बहुत महत्वपूर्ण है। चलिए एक-एक कर सभी उंगलियों की खासियतों को जानते हुए चौथी उंगली के बारे में भी जानते हैं-

पांच उंगलियां, पांच मायने

1. पहली उंगली, अंगूठे को माता-पिता का प्रतीक कहा जाता है।
2. दूसरी तर्जनी उंगली होती है, जिसे भाई-बहन का प्रतीक कहा जाता है।
3. तीसरी उंगली, मध्यमा खुद के व्यक्तित्व का प्रतीक मानी जाती है।
4. चौथी उंगली, अनामिका जीवनसाथी का प्रतीक होती है।
5. पांचवी उंगली, कनिष्ठा बच्चों का प्रतीक होती है।

आज़माकर देखें

दिए गए चित्र को खुद करके देखें। बीच वाली दोनों उंगलियों को मिलकार नीचे कर लें और बाकी चारों उंगलियों को एक-दूसरे से मिला लें। हाथ को कसकर रखें।

इतना करने के बाद एक-एक कर अंगूठों को अलग करें। ये अलग हो जाएंगे। ऐसे ही दूसरी, तीसरी और पांचवी उंगलियां भी अलग हो जाएंगी, लेकिन आपको देखकर हैरानी होगी कि काफी जतन करने के बाद भी अनामिका उंगली अलग नहीं होगी। इसी जुड़ाव के कारण इस उंगली को जीवनसाथी का प्रतीक माना जाता है।

चौथी उंगलियों की तरह जीवनसाथी भी न अलग होने के लिए मिलते हैं। जीवन के कई मोड़ ऐसे आते हैं, जहां माता-पिता, भाई-बहन और बच्चे हमसे अलग हो जाते हैं। इस अलगाव के बाद भी इन सभी का भावनात्मक जुड़ाव हमसे हमेशा बना रहता है।
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
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