बड़ों की सलाह हमेशा अच्छी
Source: भास्कर न्यूज | Last Updated 00:54(21/08/11)
करीब दो सौ साल पहले की बात है। राजनगर में एक प्रथा थी कि कोई भी व्यक्ति जब साठ वर्ष का हो जाता था तो उसे राज्य से निकालकर जंगल में भेज दिया जाता था ताकि समाज में केवल स्वस्थ और युवा लोग ही रहें। राजनगर निवासी शिवनाथ शीघ्र ही साठ वर्ष का होने वाला था। उसका जवान बेटा हरिनाथ अपने पिता से बहुत प्रेम करता था।
बेटा नहीं चाहता था कि उसके पिता को भी अन्य वृद्धों की तरह जंगल में भेज दिया जाए इसलिए उसने अपने पिता को घर के तहखाने में छुपा दिया और उनकी हर सुविधा का ध्यान रखने लगा। हरिनाथ ने एक बार अपने पड़ोसी से इस बात की शर्त लगाई कि सुबह होने पर सूरज की पहली किरण कौन देखेगा।
हरि ने अपने पिता को शर्त के बारे में बताया। पिता ने उसे सलाह दी कि जिस स्थान पर तुम सूरज की किरण दिखने का इंतजार करो वहां सभी लोग पूरब की तरफ ही देखेंगे लेकिन तुम उसके विपरीत पश्चिम की ओर देखना। पश्चिम दिशा में तुम सुदूर पहाड़ों की चोटियों पर नजर रखोगे तो तुम शर्त जीत जाओगे। हरि ने वैसा ही किया जैसा उसके पिता ने कहा था।
अगले दिन हरि ही सबसे पहले सूरज की किरण देखने वाला बना। जब लोगों ने उससे पूछा कि उसे ऐसा करने की सलाह किसने दी तो उसने सबको सच-सच बता दिया। हरि ने बताया कि उसने अपने पिता को सुरक्षित तहखाने में रखा हुआ है और पिता ने उसे हमेशा उपयोगी सलाह दी है। यह सुनकर अन्य लोग समझ गए कि बुजुर्गो का सम्मान करना चाहिए। इसके बाद से राज्य से वृद्ध व्यक्तियों को जंगल में भेजने की प्रथा बंद कर दी गई।