दिल की ज़मीं पे बरसी है प्यार की शबनम
Source: भास्कर न्यूज | Last Updated 22:56(13/08/11)
मीठा सा दर्द होता है, कभी •यादा कभी कम
तेरे प्यार का है असर, या है कोई दर्द-ए-ग़म
बरसात तो नहीं मगर, बदला-सा है मौसम
दिल की ज़मीं पे बरसी है प्यार की शबनम
शैलेश, जयपुर (राजस्थान)
ख़ामोश गुज़र जाते हैं वो क़रीब से
सवाल उठते हैं दिल में अजीब से
वो ख़फ़ा हैं या ये उनकी है अदा
शिकायत क्या करें अपने नसीब से
विशाल जैन, छतरपुर (छत्तीसगढ़)
कौन कहता है, उसके बिना मैं मर जाऊंगा
मैं तो दरिया हूं, सागर में उतर जाऊंगा
वो तरस जाएंगे प्यार की इक बूंद के लिए
मैं बादल की तरह किसी पर भी बरस जाऊंगा
निकुंज आशर, सिवनी (मध्यप्रदेश)