कभी तो साथ अपने खिजां बहार लाएगी
Source: dainikbhaskar.com | Last Updated 17:07(30/01/12)
ख्वाब सच हो तो मंजिल भी मिल जाती है
याद भी अक्सर तस्वीर में बदल जाती है
कुछ मांगो तो पूरे सच्चे दिल से मांगो
एक दुआ से अक्सर तकदीर बदल जाती है।
डॉ सुरेंद्र मीणा, नागदा (मप्र)
मेरी हंसी का हिसाब कौन करेगा?
मेरी गलती को माफ कौन करेगा?
ऐ खुदा मेरे दोस्त को सलामत रखना
मेरी शादी में बर्तन साफ कौन करेगा?
प्रमजीत, हनुमानगढ़ (राज)
जिंदगी फिर लौटकर अपने घर को आएगी
हौसले बुलंद हों तो मंजिल मिल ही जाएगी
न हो ग़मगीं मुसाफिर कि ये शहर तेरा नहीं
कभी तो साथ अपने खिजां बहार लाएगी