इस शहर के भीतर का बियाबान देखिए..
Source: भास्कर न्यूज | Last Updated 04:42(14/09/11)
बैठे-बैठे गम में गिरफ्तार हो गए
किसी के प्यार में आबाद हो गए।
दो गज जमीन मिल ही गई मुझ गरीब को
मरने के बाद हम भी जमींदार हो गए।
निकुंज आशर, सिवनी (मप्र)
कहने को आपका शहर मेरा भी शहर है,
इस शहर के भीतर का बियाबान देखिए।
मिल जाए गर फुर्सत किसी को कुछ पलों की
इस भीड़ में तन्हा-सा इक भगवान देखिए।
पंकज सारस्वत, हनुमानगढ़ (राज)
ये काली घटाएं छट जाएंगी
और मोहक बदलियां बरस जाएंगी
गर प्रिय से मिलन जो हो न सका
ये बहारें सावन की लुट जाएंगी।
सुगनचंद्र ‘नलिन’, गुना (मप्र)