पाकिस्तान की विदेश मंत्री हिना रब्बानी खर को शिकायत है कि हाल में उनकी भारत यात्रा के दौरान भारतीय मीडिया ने उनकी खूबसूरती और फैशनेबुल परिधानों पर ज्यादा गौर किया। ‘अगर मेरी जगह कोई पुरुष विदेश मंत्री होता तो क्या वे उसके पर्स और कपड़ों पर इतना ध्यान देते?,’ उन्होंने अपने मुल्क लौटकर कहा।
दूसरी ओर, हमारे यहां कुछ लोगों को शिकायत है कि हिना रब्बानी ने अपनी उम्र, चेहरे, फैशनपरस्ती से दिल जीत लिए। इसीलिए न आतंकवाद पर पाक की दोहरी नीति मुद्दा बनी, न हुर्रियत के भारत-विरोधी नेताओं से उनकी मुलाकात पर हंगामा मचा। और यह हुआ पाक विदेश मंत्री के आकर्षक व्यक्तित्व की वजह से।
सवाल यह है कि क्या आकर्षक व्यक्तित्व के धनी राजनेताओं को मीडिया में ज्यादा जगह मिलती है। या खूबसूरत राजनेताओं को मीडिया अलग ढंग से इस तरह पेश करता है जिससे उनकी राजनीतिक राह और कठिन हो जाती है? सबसे बड़ा सवाल यह कि क्या खूबसूरत और आकर्षक व्यक्तित्व के राजनीतिज्ञ दूसरों के मुकाबले आसानी से चुनाव जीत जाते हैं?
हम दुनिया भर में निगाह दौड़ाएं तो ऐसे बहुत सारे कामयाब राजनेताओं पर निगाह जाती है जो अपने आकर्षक व्यक्तित्व के लिए जाने जाते हैं। अमेरिका में जिमी कार्टर से लेकर रोनाल्ड रीगन और बिल क्लिंटन से लेकर अर्नाल्ड श्र्वाजेनेगर तक कामयाब और शिखर तक पहुंचने वाले राजनेताओं की लंबी फेहरिस्त है जिनकी राजनीतिक कामयाबी में उनके निजी व्यक्तित्व के आकर्षण की बड़ी भूमिका रही।
कुछ वर्ष पहले अचानक शून्य से उभरे बराक ओबामा के राष्ट्रपति पद तक पहुंचने में उनके आकर्षक व्यक्तित्व का बड़ा हाथ माना जाता है। अन्य देशों में भी कई कामयाब राजनेता खूबसूरत व्यक्तित्व के स्वामी रहे हैं। वामपंथी राजनीति में भी लेनिन से लेकर फिदेल कास्त्रो तक कई राजनेताओं के मोहक व्यक्तित्व ने युवाओं को उतना ही लुभाया जितना उनके क्रांतिकारी विचारों ने।
हमारे देश में जवाहरलाल नेहरू स्वतंत्रता आंदोलन के सबसे प्रमुख राजनेता के रूप में उभरे। आजादी की लड़ाई में उनके योगदान और विद्वता के अलावा उनके खूबसूरत व्यक्तित्व ने भी हमारी एकाधिक पीढ़ियों को मोहित किया। उनके नाती और आकर्षक व्यक्तित्व के धनी राजीव गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस ने संसदीय इतिहास में लोकसभा की सबसे ज्यादा सीटें जीतीं। उदाहरण कई हैं जो बताते हैं कि आकर्षक व्यक्तित्व के लोग राजनीति में ज्यादा सफल हुए हैं।
वैज्ञानिक अध्य्यन भी इस रुझान की तस्दीक करते हैं। पिछले वर्ष फिनलैंड में हेलसिंकी यूनिवर्सिटी के अर्थशास्त्र विभाग ने एक अध्ययन किया। इसमें राजनीतिक उम्मीदवारों की 1,992 तस्वीरें 10,011 लोगों को दिखाई गईं जिनमें 6,303 मतदाता फिनलैंड के बाहर के थे। लोगों को पता नहीं था कि ये किन राजनीतिज्ञों की तस्वीरें हैं और उनके विचार या पृष्ठभूमि क्या है।
जब उनसे इनमें से चुनने के लिए कहा गया तो सभी ने आकर्षक दिखने वाले राजनीतिज्ञों को चुना। यही नहीं, जो उम्मीदवार जितना ज्यादा आकर्षक था उसे उतना ही ज्यादा भरोसेमंद, बुद्घिमान, काबिल माना। निष्कर्ष यह कि ‘खूबसूरत लोग दूसरों के मुकाबले ज्यादा सफल होते हैं, चाहे वे राजनीति में हों या शो-बिजनेस में।’
मेसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के रिसर्चर्स ने ब्राजील और मेक्सिको के कुछ उम्मीदवारों की तस्वीरें अमेरिका, भारत और मेक्सिको के मतदाताओं को देकर कहा कि वे इनमें से सबसे अच्छे का चुनाव करें। तीनों देशों के मतदाताओं ने समान उम्मीदवार का चुनाव किया, बल्कि आकर्षक व्यक्तित्व को योग्यता का भी पैमाना माना।
इजरायल की यूनिवर्सिटी ऑफ हाइफा के संचार विभाग ने तीन न्यूज चैनलों पर आने वाले राजनेताओं का अध्ययन किया और पाया कि खूबसूरत और आकर्षक व्यक्तित्व के धनी राजनेताओं को टेलीविजन पर ज्यादा न्यूज कवरेज मिलता है जिससे उनकी सफलता की संभावना बढ़ जाती है।
ये निष्कर्ष उन लोगों को शायद निराश करें जो लोकतंत्र को राजनेताओं के चेहरे की बजाय गुणों पर निर्भर देखना चाहते हैं। आखिर खूबसूरत चेहरों को चुनने की प्रवृति लोकतंत्र को प्रहसन में बदल देती है। लेकिन यह पूरा सच नहीं है।
आकर्षक व्यक्तित्व का धनी शख्स राजनीति में आता है, तो प्रारंभ में उसे जरूर खूबसूरती का फायदा मिलता है। पर जैसे-जैसे उसके राजनीतिक गुण-दोष सामने आते हैं, लोग खूबसूरती से ज्यादा प्रकट योग्यता के आधार पर निर्णय करते हैं। ऐसा नहीं होता तो कई खूबसूरत राजनेताओं को हम चुनाव के मैदान में शिकस्त खाते नहीं देखते।
आकर्षक व्यक्तित्व के लिए ख्यात इंदिरा गांधी ने आपातकाल थोपकर जब लोकतांत्रिक मर्यादाओं के साथ छेड़छाड़ की तो उनका आकर्षक व्यक्तित्व उस राजनीतिक पराभव से उन्हें बचा नहीं सका। एक समय राजीव गांधी की राजनीतिक सफलता को उनके मोहक व्यक्तित्व से कहीं ज्यादा बोफोर्स के आरोपों ने तय किया। पाकिस्तान में बेनजीर भुट्टो के राजनीतिक उत्थान-पतन इतने जबरदस्त रहे कि उनके व्यक्तित्व का सौंदर्य और आकर्षण समय के साथ अप्रासंगिक हो गया।
हिना रब्बानी अगर अपने राजनीतिक गुणों का परिचय देती हैं तो लोग भी उनकी खूबसूरती और फैशनेबुल परिधानों से आगे देखेंगे। लेकिन अगर उनकी राजनीतिक योग्यताएं कम व सीमित हैं तो अगली बार उनकी भारत यात्रा केवल खूबसूरती के बल पर राजनीतिक रूप से कामयाब नहीं हो सकेगी।