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हमारा जोड़ा

 
Source: रविकांत   |   Last Updated 12:11(21/01/12)
 
 
 
 
हमने एक-दूसरे में देखे
तमाम विरोधाभास
एक साथ नहीं चल सके।
हमारे मूल्य एक हैं
मेयार हैं अलग
अलग-अलग है हमारी राह
हमारा जोड़ा नहीं बन सका।
हम एक दूसरे से करते हैं प्रेम।
जिसे कहते हैं प्रेम
किसी और से नहीं कर सकते कभी।
अब भी
मन ही मन
एक-दूसरे से कहते हैं हम
- आई लव यू वेरी मच।
एक दूसरे के बिना
नहीं जी रहे हैं हम।

तुम आओ, मेरी चांद

मेरी चांद..
बहुत सारे शहर
तुम्हे याद करने की यादों से भरे हैं
नदियां और उनकी ओर जाती नदियां तमाम..
जैसे हरिद्वार
गंगा और उसके घाट
श्रीनगर की धूप, चौराहे
अमरनाथ की सुनहरी बर्फ
मेरे माथे से लगी एटा की धूल
महेंद्र नगर के चौड़े बाÊार का सूनापन
संभलपुर की डरावनी रात
पुरी के तट पर तुम्हारे नाम को समेट कर ले जाती लहरें
देवबंद की गलियों की भटकन
बनारस का सबकुछ
इलाहाबाद की लू
लखनऊ की तपिश
दिल्ली की खटास
चंडीगढ़ की हवा
पानीपत के नाले
बागेश्वर की सरयू..
चंद्रमा हर बार तुम्हारे दूर होने को असह्य बनाता है..
तुम्हे याद करने की यादों से भर चुका है मेरा जहां..
तुम आओ मेरी चांद..
अपनी यादों को बेदखल करने
उनमें नया अर्थ भरने
अपने दोनों हाथों से मुझे थाम लेने के लिए..
मेरी चांद..।

(रविकांत को उनके कविता संग्रह ‘यात्रा’ के लिए 2010 का हेमंत स्मृति पुरस्कार प्रदान किया गया है।)
 
 
 
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