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साल ने ठुकराई पीपल की सलाह

 
Source: Bhaskar   |   Last Updated 00:07(31/07/11)
 
 
 
 
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भोर का समय था। जंगल में उस दिन बारिश हो रही थी। सारे वृक्ष एक दूसरे से बातचीत में मशगूल थे। बरगद ने अपनी विशाल शाखाएं हिलाते हुए दूसरे वृक्षों से कहा, ‘जानवर हमारी छाया में आकर आराम करते हैं, लेकिन अपने पीछे भारी गंदगी छोड़ जाते हैं। बदबू से बुरा हाल हो जाता है।’ साल के वृक्ष ने उसकी हां में हां मिलाई, ‘हम चुप रहते हैं इसलिए कोई हमारी तरफ ध्यान नहीं देता।

अब हमें जानवरों को भगाना ही पड़ेगा।’ पीपल का पेड़ वहां सबसे बुजुर्ग था। उसने कहा, ‘नहीं, ऐसा करना ठीक नहीं होगा। जानवर हमारे लिए परेशानी का सबब हैं इससे इनकार नहीं, लेकिन वे हमारे काम भी आते हैं। हम सब एक दूसरे पर निर्भर हैं। वृक्ष, जानवर, इंसान, सब। इसलिए हमें जानवरों को भगाने का निर्णय नहीं लेना चाहिए।’ इस पर साल वृक्ष ने क्रोध में कहा, मैं किसी की नहीं सुनूंगा।

अब से मैं किसी जानवर को यहां नहीं आने दूंगा।’ अगले दिन उसने ऐसा ही किया। जब एक तेंदुआ उसकी छाया में सुस्ताने आया तो साल ने अपनी टहनियों को जोर-जोर से हिलाना शुरू कर दिया। डर के मारे तेंदुआ वहां से भाग खड़ा हुआ। कुछ दिन के बाद जानवरों का वहां आना कम हो गया। वे जंगल में दूसरी जगह चले गए। कुछ हफ्तों बाद एक दिन दो लकड़हारे आए और साल के नीचे बैठ गए।

साल ने पूछा, ‘ये इंसान यहां क्यों आए हैं?’ जवाब पीपल ने दिया, ‘पहले ये यहां नहीं आते थे क्योंकि इन्हें डर था कि यहां जंगली जानवरों का बसेरा है। लेकिन जब से बाघ-तेंदुओं ने आना बंद किया है, इनकी हिम्मत बढ़ गई है।’ बस फिर क्या था। देखते ही देखते लकड़हारों ने कुल्हाड़ी निकाली और पहला वार साल के वृक्ष पर ही किया।
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
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