विज्ञापन
 
 
 
 

वो नादान बचपन ही कितना प्यारा था..

 
Source: भास्कर न्यूज   |   Last Updated 00:09(22/09/11)
 
 
 
 
विज्ञापन
काग़ज़ की कश्ती थी पानी का किनारा था
खेलने की मस्ती थी दिल ये आवारा था
कहां आ गए इस समझदारी के बादल में
वो नादान बचपन ही कितना प्यारा था।
यश लखेरा, मण्डला (मप्र.)


तुम्हारी पसंद मेरी चाहत बन जाए
मुस्कराहट दिल की राहत बन जाए
ख़ुदा ख़ुशियों से इतना तुम्हें नवाज़ दे
तुमको ख़ुश देखना मेरी आदत बन जाए।
मनोज बिश्नोलिया, झुंझुनूं (राज.)


अश्कों को मोती बना देती है दोस्ती
ज़ख्मों पे मरहम लगा देती है दोस्ती
जब जीने की वजह ही न बची हो
तब मौत को भी ज़िंदगी बना देती है दोस्ती।
विष्णु प्रसाद चौहान, हरदू (मप्र.)
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
आपके विचार

 
 
कोड :
1 + 6

 
 
विज्ञापन
 

बड़ी खबरें

 
 
 
 
 
 
 
 
 

रोचक खबरें

 
 
 
 
 
 
 
 
 

बॉलीवुड

 
 
 
 
 
 
 
 
 

जीवन मंत्र

 
 
 
 
 
 
 
 
 

क्रिकेट

 
 
 
 
 
 
 
 
 

बिज़नेस

 
 
 
 
 
 
 
 
 

जोक्स

 
 
 
 
 
 
 
 
 

पसंदीदा खबरें

 
 
 
 
 
 
 
 
 

फोटोगैलरी

Most Viewed

ट्विटर पर जिस्म -2
रेड हॉट
Just Added

'राउडी राठौर'
Unveiling Victoria's latest collection
 
 
 
विज्ञापन
 
 
| Email  Print Comment
| Email  Print Comment
(2)
Latest | Popular