विज्ञापन
 
 
 
 

मुस्कुराहट

 
Source: अमेय कान्त   |   Last Updated 23:25(07/08/11)
 
 
 
 
विज्ञापन
धूप ने आकर नन्ही बच्ची के गालों पर
अपने हाथ पोंछ दिए
और बच्ची धीरे-धीरे फूल में बदलने लगी
उसकी मुस्कुराहट अब
फूल की मुस्कुराहट थी
जो ख़ुशबू बन कर
उड़ रही थी चारों ओर

उड़ते - उड़ते वह ख़ुशबू
जो असल में मुस्कुराहट थी
उस नन्ही बच्ची की
एक चिड़िया में बदल गई
जो फुदकने लगी यहां - वहां
अब इस मुस्कुराहट के पंख थे
और आवाज़ भी
अब इसे हर कोई सुन सकता था।

चिड़िया बन कर मुस्कुराहट
उड़ने लगी खुले आकाश में
और बदलने लगी हवा में
हवा बही हर दिशा में
बहते-बहते हवा बदल गई नदी में
मुस्कुराहट अब बह रही थी नदी बनकर
कहीं शांत, कहीं उफान पर
आख़िरकार नदी मिल गई समुद्र में
और मुस्कुराहट फैल गई पूरी पृथ्वी पर
बच्ची की मुस्कुराहट
अब पृथ्वी की मुस्कुराहट थी

नदी

नदी बदल रही है
नदी लगभग हर क्षण बदल रही है
लेकिन बदल तो दरअसल पानी रहा है
तो क्या नदी का बदलना
असल में पानी का बदलना है
या लगातार बदलते रहने की प्रक्रिया में
यह नदी का हर क्षण पानी हो जाना है
शायद पानी
नदी में बदल रहा है..
 
 
 
अगली खबर
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
आपके विचार

 
 
कोड :
10 + 10

 
 
विज्ञापन
 

बड़ी खबरें

 
 
 
 
 
 
 
 
 

रोचक खबरें

 
 
 
 
 
 
 
 
 

बॉलीवुड

 
 
 
 
 
 
 
 
 

जीवन मंत्र

 
 
 
 
 
 
 
 
 

क्रिकेट

 
 
 
 
 
 
 
 
 

बिज़नेस

 
 
 
 
 
 
 
 
 

जोक्स

 
 
 
 
 
 
 
 
 

पसंदीदा खबरें

 
 
 
 
 
 
 
 
 

फोटोगैलरी

Most Viewed

ट्विटर पर जिस्म -2
रेड हॉट
Just Added

'राउडी राठौर'
Unveiling Victoria's latest collection
 
 
 
विज्ञापन
 
 
| Email  Print Comment
| Email  Print Comment