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वह मेरा पहला अनुत्तरित प्रेमपत्र

 
Source: मैत्रेयी पुष्पा   |   Last Updated 00:06(03/07/11)
 
 
 
 
यह मेरा पहला प्रेम था जो बाद में मेरी प्रेरणा भी बना। बात तब की है जब मेरी उम्र तकरीबन 14-15 साल की रही होगी। मैं 11वीं कक्षा में पढ़ा करती थी। उसी कॉलेज में 12वीं में एक लड़का पढ़ता था। वह मुझसे उम्र में तीन या चार साल बड़ा रहा होगा।

हम अक्सर ही आते-जाते समय राह में टकरा जाया करते थे। वह पुराना समय था और हम दोनों ही स्वभाव से शर्मीले और संकोची थे। इन दिनों टीवी पर एक विज्ञापन आता था - ‘इशारों इशारों में दिल लेने वाले..।’ वह मुझे बहुत अच्छा लगता है।

उसे देखकर मुझे अपने स्कूल कॉलेज के दिनों की याद आ जाती है। हुआ यह कि एक दिन मौका लगाकर उसने मुझे एक चिट्ठी या कहें प्रेमपत्र दे ही दिया। जाहिर है जब किसी लड़की को पहली बार प्रेमपत्र मिले तो उसका डरना लाजिमी है। मैंने उस पत्र का जवाब तो लिखा लेकिन उसे दे नहीं पाई।

उसे भी मेरी भावनाओं का अंदाजा हो गया था लेकिन मैंने शायद लोकाचार और समाज के डर के चलते उसे डांट लगाई तो उसने कहा था कि तुम प्रेम भी करती हो और उसे छिपाना भी चाहती हो। ये दोनों काम एक साथ नहीं हो सकते। वह लड़का मुझे पसंद था लेकिन..। खैर समय बीतता रहा और एक दिन मेरी शादी हो गई।

लेकिन उसकी याद मेरे मन से गई नहीं। जब भी कोई मुझसे झांसी से मिलने आता तो मैं जरूर उसके बारे में पूछतीं। कुछ लोग तो सोचते भी क्यों पूछती है उसके बारे में।

फिर करीब 30 साल के बाद जब मैंने अपना पहला उपन्यास ‘इदन्नमम’ लिखा। वह बहुत लोकप्रिय भी हुआ। उसके बाद मुझे उस लड़के के प्रेम-पत्र की याद आई जो उसने मुझे कविता के रूप में दिया था। उसने अपनी बेटी की शादी में मुझे बुलाया भी और मैं वहां गई। जब मैं उसके साथ-साथ चल रही थी तो कहीं मन में एक बात सालती रहीं कि काश इसके साथ मैं रह पाई होती।

(जैसा उन्होंने पूजा सिंह से कहा)
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
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