पेटेंट, कॉपीराइट ट्रेडमार्क के वकील
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| May 05, 2012, 16:36PM IST

बौद्धिक संपत्ति अधिकार के प्रकार
कॉपीराइट : इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी राइट के इस रूप में किसी व्यक्ति द्वारा संगीत, साहित्य और डिजाइन जैसे क्षेत्रों में किए गए मूल और रचनात्मक कार्यो को शामिल किया जाता है। इसे सूचित किया जाता है।
पेटेंट : दूसरा है पेटेंट, यह सरकार द्वारा दिया गया विशेषाधिकार है, जो आविष्कार करने वाले को उस खास आविष्कार के लिए दिया जाता है।
भौगोलिक संकेत: इस संकेत का उपयोग ऐसे खास उत्पादों के लिए किया जाता है, जिनका उत्पादन और पैदावार किसी खास भौगोलिक क्षेत्र या देश में होती है।
ट्रेडमार्क : ट्रेडमार्क का निशान और 0 होता है। और इसका उपयोग किसी खास व्यवसाय या कारोबार से जुड़े उत्पादों को सुरक्षित करने के लिए किया जाता है, जिसके बाद किसी अन्य उत्पाद के लिए इसका उपयोग नहीं किया जा सकता।
करिअर विकल्प
इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी लॉयर कानूनी गुरों को टेक्नोलॉजी, बिजनेस और कला जैसे कई अन्य खास बातों के साथ मिलाकर अपना काम करते हैं। यह क्षेत्र ऐसे लोगों के लिए बेहतर प्लेटफॉर्म साबित हो सकता है, जो आविष्कार की प्रकृति, बौद्धिक संपदा से जुड़े अधिकारों के महत्व और ग्राहक के व्यवसाय पर इसके प्रभावों को समझते हैं। इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी वकील रचनात्मक विचारों का सहारा लेते हैं, जिससे उनके दिमाग में नए विचार विकसित हो सकें और ग्राहक के आईपी पोर्टफोलियो का महत्व अधिक बढ़ाया जा सके। इसके अलावा वे नए नियम और कानूनों पर चलने की भी सलाह देते हैं, जिससे अनूठे विचारों की सुरक्षा की जा सके। इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी लॉयर खुद को ग्राहक की मांग के अनुसार ढाल लेते हैं। कभी वे आवेदन पत्र और इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी लाइसेंसिंग के लिए अनुबंध और कई अन्य कानूनी कागजातों जैसे ड्राट और अपील को तैयार करने के लिए लेखक की भूमिका अदा करते हैं। तो कभी ग्राहकों को ट्रेडमार्क, कॉपीराइट, पेटेंट, इंडस्ट्रियल डिजाइन आदि के रूप में उनकी इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी को सुरक्षित रखने के लिए अपना मत देकर काउंसलर की भूमिका भी अदा करते हैं। इसके साथ ही वे मुकदमों में कानूनी सलाह भी उपलध कराते हैं। कई बार वे इंजीनियर की भूमिका भी अदा करते हैं, खासकर पेटेंट लॉयर, क्योंकि आविष्कार के पेटेंट से जुड़ी बारीकियों को समझने के लिए उनकी पृष्ठभूमि तकनीकी होती है।
योग्यता: इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी राइट एक ऐसा विषय है, जिसे अध्ययन के लिए वकीलों के अलावा अन्य प्रोफेशनल भी चुन सकते हैं। इस क्षेत्र में कई संस्थान इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी, पेटेंट लॉ, आईपीआर मैनेजमेंट और इससे जुड़े कई विषयों में पीजी डिप्लोमा, डिप्लोमा और सर्टिफिकेट कोर्स उपलध कराते हैं। जिसके तहत पार्ट टाइम, फुल टाइम और दूरस्थ शिक्षा की सुविधा भी उपलध कराई जाती है। इस कोर्स में दाखिले के लिए उमीदवार के पास किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से किसी भी विषय में स्नातक या उसके समकक्ष डिग्री का होना जरूरी है। इसके अलावा लॉ से जुड़े कई कोर्स आईपीआर में विशेषज्ञता भी उपलध कराते हैं। इसके साथ ही यह कोर्स नौकरीपेशा लोगों और ऐसे छात्र जो आईपी में बेहतर करिअॅर की तलाश कर रहे हैं, दोनों के लिए ही उपयुक्त है। आईपीआर से जुड़े ज्यादातर कोर्स इस बात को ध्यान में रखकर तैयार किए जाते हैं कि इससे न सिर्फ कानून के क्षेत्र से जुड़े लोग, बल्कि कॉपरेरेट और बिजनेस संस्थाओं से जुड़े बाकी पेशेवरों को भी फायदा मिल सके, जिससे उन्हें अपनी संस्था द्वारा उत्पादित बौद्धिक संपदा को पहचानने और उसका बेहतर ढंग से उपयोग करने में मदद मिल सके। भारतीय पेटेंट एजेंट के संबंध में पहली आवश्यकता भारत की किसी भी यूनिवर्सिटी से साइंस, इंजीनियरिंग या टेक्नोलॉजी की डिग्री का होना है।
जॉब प्रॉस्पेक्ट
ऐसे लोग जो आईपी क्षेत्र में विशेषज्ञता हासिल करना चाहते हैं, उनके लिए इस क्षेत्र में अवसरों की कमी नहीं है। इनमें कानूनी फर्म और सॉटवेयर कंपनियों से लेकर फास्ट मूविंग कंज्यूमर गुड्स कंपनियां ड्यूरेबल गुड्स उद्योग, कृषि और फार्मास्यूटिकल क्षेत्र में काम करने वाली संस्थाएं और विज्ञान व प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में काम कर रहे रिसर्च इंस्टीट्यूट भी शामिल हैं। कुछ वर्षो से कई वकील और कानूनी संस्थाएं आईपीआर से संबंधित मामलों से निबटने के लिए अपने ग्राहकों को विशेषज्ञता उपलध कराने में लगी हुई हैं। ये संस्थाएं ग्राहकों की लंबी फेहरिस्त को रजिस्ट्रेशन, प्रवर्तन, मुकदमे व ट्रेडमार्क, डिजाइन, पेटेंट और कॉपीराइट आदि की लाइसेंसिंग जैसी सुविधाएं उपलध कराने के साथ ही इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी ट्रियूनल, कोर्ट और कस्टम संस्थाओं के सामने उनकी इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी की सुरक्षा और उन्हें सलाह देने का काम भी करती हैं। कई कानूनी संस्थाओं के पास अपना एक विशेष विभाग होता है, जो इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी से जुड़े मामलों को देखता है। इसके अलावा इंजीनीयर और वैज्ञानिक भी आईपी में विशेषज्ञता हासिल कर सकते हैं। तकनीकी ज्ञान रखने वाले वकील इस भूमिका में बेहतर ढंग से फिट हो सकते हैं । किसी भी नए आविष्कार और रिसर्च प्रोजेक्ट पर काम कर रहे व्यक्ति या संस्था के पेटेंट एजेंट के तौर पर भी काम कर सकते हैं। ऐसे वैज्ञानिक जो किसी रिसर्च प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं, उनके लिए अपनी बौद्धिक संपदा को सुरक्षित रखना बहुत ही आवश्यक हो जाता है। रिसर्च और डेवलपमेंट कार्यक्रमों को बेहतर बनाने या रिसर्च से जुड़े नए पहलुओं पर काम करते समय, उचित कानूनी दस्तावेजों और पेटेंट संबंधित सुरक्षा की जरूरत होती है, इसलिए आईपी का ज्ञान उनके लिए जरूरी होता है।
इसके अलावा मार्केटिंग और ब्रांड मैनेजमेंट से जुड़े प्रोफेशनल जो एफएमसीजी और ड्यूरेबल गुड्स इंडस्ट्री के साथ काम कर रहे हैं और जिन्हें प्रॉडक्ट से जुड़े प्रतीक चिह्नों और निशानों के उपयोग के निहितार्थो और उनके न होने पर नतीजा क्या हो सकता है इसको समझने की जरूरत है, उनके लिए भी आईपी का अध्ययन उपयोगी हो सकता है। इसकी उपयोगिता चार्टर्ड अकाउंटेंटों के लिए भी है। ग्राहक की बौद्धिक संपदा का मूल्यांकन, पेटेंट की रेटिंग, बौद्धिक संपदा के आर्थिक पहलुओं का संचालन, प्रमुख संपत्ति के रूप में बौद्धिक संपदा का लेखांकन करते समय विषय का ज्ञान उनके लिए आवश्यक होता है। यही बात कंपनी सेक्रेटरीज और अन्य पेशेवरों के साथ भी लागू होती है। आज बौद्धिक संपदा की सुरक्षा इतनी आवश्यक हो चुकी है कि व्यावहारिक तौर पर हर नया प्रॉडक्ट चाहे वह फिल्म, यूजिक वीडियो, सॉटवेयर प्रोग्राम, लोगो, डिजाइन या किसी ब्रांड का नाम, इन सभी के लिए यह सुनिश्चित करने की जरूरत है कि असली की नकल या उसे परिवर्तित न किया जा सके। इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी राइट ऐसे व्यक्तियों के लिए आकर्षक क्षेत्र है, जिनके पास मजबूत विश्लेषणात्मक क्षमता, रीजनिंग व लॉजिकल गुण और सुरक्षित करने की प्रवृिा है। एक आईपीआर विशेषज्ञ अपने करिअॅर की शुरुआत 15,000 से 30,000 प्रतिमाह सैलरी से कर सकता है। इसके आगे वेतनमान क्षेत्र में विशेषज्ञता और काम के विस्तार पर निर्भर करता है। ै





