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भइया बंदरिया का ब्याह जी!!

dainikbhaskar.com | Oct 12, 2012, 09:56AM IST
 
 

बूढ़ा बंदर परेशान था,
थक कर लेटा, भरता आह!
परसों आएंगे बाराती,
बिटिया का हो रहा विवाह।

सबसे छोटी प्यारी बिटिया,
चल देगी ससुराल।
बड़े प्यार से पाला मैंने,
जाने क्या हो हाल।

अच्छा घर है, वर भी अच्छा,
मिली कुंडली भी बढ़िया।
सारंगढ़ के रहने वाले,
हैं अपने छत्तीसगढ़िया।

मान रखूंगा समधी जी का,
खुश होंगे बाराती।
जितना चाहे खर्च करूंगा,
अंतिम है यह शादी।

गोधुलि बेला भी आ गई,
आए फिर बाराती।
स्वागत होगा समधी जी का,
गले मिले घराती।
जब दूल्हे को तिलक लगाने,
पंडित जी ने हाथ बढ़ाया।
बंदर समझा मार रहा है,
झपटा नोचा दांत गड़ाया।

भांवर अब प्रांरभ हो गई,
दुल्हन आगे दूल्हा पीछे।
बंदर लग गए जुआं बीनने,
दुल्हन के सब बाल खींचे।

पूड़ी जलेबी की टेबल पर,
मचा बड़ा हंगामा।
जान बचा भागा हलवाई,
छोड़ गया पजामा।

घराती-बाराती में तो,
मची थी झूमा झटकी।
छीन झपटते कतली हलुआ,
प्लेट दनादन पटकी।

जैसे-तैसे ब्याह हुआ तब,
आई विदाई की बेला।
बूढ़े बंदर का मन रोया,
अब मैं हुआ अकेला।

सुख से रहना जीवन भर तू,
मेरी बिटिया रानी!
सिर पर फेरे हाथ आंख से,
टप-टप बहता पानी।
 
 
 

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