सहभागिता कर बढ़ाएं नए बाजार में कदम
Source: एन. रघुरामन | Last Updated 09:25(10/02/12)
यदि आपने कोलकाता में पंद्रह दिन भी गुजारे हैं तो आपके लिए यह कहना मुश्किल होगा कि आपने वहां की सर्वाधिक पसंदीदा मिठाई रसोगोल्ला (जिसे हम रसगुल्ला कहते हैं) नहीं खाई। लिहाजा यह कोई न्यूज आइटम नहीं है। लेकिन यदि कोई आपसे कहे कि उसने वहां कई बार चॉकोगोल्ला खाया है, तो क्या प्रतिक्रिया होगी? हाल ही में कोलकाता से लौटे मेरे एक मित्र ने मुझसे जब चॉकोगोल्ला का जिक्र किया, तो मेरे कान खड़े हो गए। कैडबरी ने अपनी अनूठी कैंपेन के तहत कोलकाता की मशहूर मिष्टी शॉप्स के साथ टाई-अप करते हुए चॉकलेट्स की एक फ्यूजन वैरायटी तैयार की है। कैडबरी का यह कदम पारंपरिक मिष्ठान बाजार में आक्रामक ढंग से उतरने का प्रयास है, जो उसकी टैगलाइन 'कुछ मीठा हो जाए' के साथ बेहतर तरीके से जम जाएगा।
कैडबरी ने इस महानगर की नौ अग्रणी मिष्ठान शृंखलाओं के साथ टाई-अप किया है। कोलकाता की मिष्ठान इंडस्ट्री काफी असंगठित है और उसके पास अपने उत्पादों को प्रदर्शित करने के लिए समुचित संसाधन व माध्यम नहीं हैं। इसलिए कैडबरी ने असंगठित मिष्ठान भंडारों की ओर से जिस मुहिम को हाथ में लिया है, वह मिष्ठान भंडार के स्वामियों तथा कैडबरी दोनों के उत्पादों को बेहतर प्रदर्शन का मौका मुहैया करा रहा है। हालांकि कैडबरी बंगाल के पारंपरिक मिष्ठान बाजार को विस्थापित नहीं कर सकता, लेकिन इसमें मीठे के शौकीन ग्राहकों को लुभाने की क्षमता तो है ही, जिस वजह से यह स्थानीय आबादी के मध्य चर्चा का विषय बन गया है। अब स्थानीय मिष्ठान भंडार मालिक कैडबरी डेयरी मिल्क से बनने वाले 'चॉकलेट फज संदेश', 'गिलाटो संदेश' और 'मड पाई संदेश' जैसे नए उत्पाद बेच रहे हैं। इसके लिए कंपनी ने कोलकाता के रहवासियों के बीच एक जनमत सर्वे भी करवाया और इसके प्रमोशन के लिए कई जाने-माने टॉलीवुड सितारों को सेलिब्रिटी एंबेसडर के तौर पर साथ जोड़ा।
भारत में चॉकलेट व मिठाइयों की प्रति व्यक्ति खपत 20 ग्राम के आस-पास है जबकि ज्यादातर यूरोपीय देशों में यह आंकड़ा 5 से 8 किलो के बीच है। इस लिहाज से कैडबरी की बाजार के नए हिस्सों में पहुंचने की कोशिश समझी जा सकती है। कोऑप्टीशन मैनेजमेंट की भाषा में अपेक्षाकृत नया शब्द है। यह दो शब्दों कॉम्पिटीशन (प्रतिस्पद्र्धा) और कोऑपरेशन (सहभागिता) से मिलकर बना है। इसका मतलब है कि जहां आप बाजार में अपने प्रतिस्पद्र्धी से होड़ करते हैं, वहीं नए क्षेत्र में प्रवेश के लिए उसके साथ सहभागिता भी करते हैं। जब 1990 के दशक के मध्य में रीबॉक कंपनी इस देश में आई, तो इसने यहां पर अपना कोई आउटलेट खोलने के बजाय बाटा के साथ सहभागिता करते हुए उसके शोकेस में अपने लिए थोड़ी जगह मांगी। बाटा ने उसे अपने आउटलेट्ïस में जगह दे दी, यद्यपि उनके उत्पाद समान (जूते) ही थे। उसने ऐसा इसलिए किया क्योंकि रीबॉक के जूते अमीर ग्राहकों के लिए ही थे।
बाटा का सबसे महंगा ब्रांड हशौप्पी मात्र 1500 रुपए में बिक रहा था, जबकि रीबॉक के जूतों की रेंज 2200 से शुरू होती थी। इस सहभागिता से दोनों को फायदा मिला। उनकी दुकान पर आने वाले ग्राहकों में से जो रीबॉक लेना वहन कर सकते थे, वे इसे खरीद लेते, जबकि बाकी लोग बाटा के जूते खरीदते। इसी तरह कैडबरी भी अपना चॉकोगोल्ला ऐसे लोगों को नहीं बेच रही है, जो बंगाली मिठाइयों के बेहद शौकीन हैं, बल्कि वे नए यंगस्टर्स को अपना लक्ष्य बना रहे हैं जो कुछ अलग खाना पसंद करते हैं।
फंडा यह है कि...
कारोबारी जगत में आपके प्रतिद्वंद्वी हो सकते हैं, लेकिन एंट्री पीरियड में उनके साथ सहभागिता कायम करने से दोनों का फायदा होगा।
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मैनेजमेंट फंडा एन. रघुरामन