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ईमानदारी से कमाएं बेहतर आजीविका

एन. रघुरामन | Apr 05, 2012, 11:10AM IST
 
 

क्या आप कल्पना कर सकते हैं कि आप ऑटो में बैठकर कहीं जा रहे हों और तभी अचानक ऑटो ड्राइवर आपसे एक मोबाइल टैरिफ प्लान या कोई सिम कार्ड बेचने की बात करने लगे? बहरहाल, 24 मार्च को मेरे साथ मुंबई में ऐसा ही हुआ। मैं अपने एक रिश्तेदार के लिए एक सिम कार्ड खरीदना चाहता था, जो उस रात दुबई से आ रहा था और यहां पर अपनी कॉल्स के लिए स्थानीय सिम कार्ड इस्तेमाल करना चाहता था। ऑटो ड्राइवर द्वारा पैकेज का ऑफर देते ही मैंने उससे कहा कि वह अपना ऑटो रोककर मुझे इस बारे में ढंग से बताए। इसके बाद उसने मुझे तमाम टैरिफ प्लांस के बारे में बताया और हमारा सौदा पटने के बाद उसने मुझे वापस घर छोड़ दिया। हैरान करने वाली बात यह थी कि आखिर एकऑटो ड्राइवर सिम काड्ïर्स कैसे बेच सकता है? क्या वह इसके लिए अधिकृत है। तब क्या होगा अगर कोई असामाजिक तत्व इस सिम कार्ड को लेकर इसका गलत कामों में इस्तेमाल करने के बाद किसी दूसरे व्यक्ति को बेच दे?

दरअसल 23 मार्च को मुंबई में तकरीबन 30 ऑटो ड्राइवरों ने सिम कार्ड सेल्समैन के तौर पर एक समानांतर कॅरियर शुरू किया है। इसके साथ ही 400 से ज्यादा 'ईमानदार' ऑटो वालों को मोबाइल टैरिफ प्लांस बेचने की ट्रेनिंग दी जा रही है, ताकि वे अपनी आमदनी बढ़ा सकें। ये ड्राइवर 'रिक्शावाले' नामक एक कंपनी के साथ जुड़े हैं, जो मुंबई महानगर की पहली डायल-एन-ऑटो सर्विस प्रोवाइडर कंपनी है। यह कंपनी इस बात का खास ख्याल रखती है कि उसके यहां पंजीकृत किसी भी ऑटो के मीटर में छेड़छाड़ न की गई हो। इसका दूसरा पहलू यह है कि ये ऑटो ड्राइवर अपने धांधलेबाज साथी चालकों के मुकाबले दिन में 200 रुपए तक कम कमा पाते हैं। और इस खाई को पाटने के लिए ईमानदार ऑटो ड्राइवरों ने अपनी आमदनी बढ़ाने का फैसला किया। उनके मन में पानी, कोल्ड ड्रिंक्स से लेकर ऐसी कई चीजों को बेचने का ख्याल आया, जिनकी सफर के दौरान मुसाफिरों को जरूरत पड़ती है।

आखिरकार उन्होंने सेलफोन सिम कार्ड बेचने का फैसला किया। फोन कंपनी उन्हें प्रति एक्टिवेशन ढाई सौ रुपए देती है। याद रखें कि जब वे हेर-फेर वाले मीटर के साथ ऑटो चलाते थे, तब रोज महज 200 रुपए अतिरिक्त कमाते थे। वैसे इन ड्राइवरों के लिए यह एक चुनौतीपूर्ण अनुभव है क्योंकि उन्हें इसके लिए अपने ऑटो में बैठे मुसाफिर से बातचीत करते हुए उसे एक नया सिम कार्ड या नया प्लान बेचना होता है। मैंने जिस ऑटोरिक्शा चालक से सिम कार्ड खरीदा था, यह उसकी पहली बिक्री थी। जब मैंने उसे बताया कि इस ऑटोरिक्शा के बिजनेस में उसकी ईमानदारी की वजह से ही मैं यह सिम कार्ड उससे खरीद रहा हूं, तो वह खुशी से उछल पड़ा।

आने वाले हफ्तों में ये ड्राइवर प्रीपेड मोबाइल कनेक्शनधारकों को टॉप अप प्लान भी बेचने लगेंगे। यहां तक कि 'चेंज की समस्या' को टॉप अप प्लांस के साथ सुलझाया जा सकता है। वे 'चेंज' न होने की सूरत में आपको टॉफी या चॉकलेट नहीं देंगे। लोग भी टॉफी के बदले अपने मोबाइल के लिए कोई टॉप अप प्लान लेने के लिए तैयार हो जाएंगे। वे रेलवे वालों से भी सब-अर्बन टिकट बुकलेट्ïस बेचने के बारे में बातचीत कर रहे हैं। ऐसा करने से रेलवे काउंटरों पर ज्यादा भीड़ भी जमा नहीं होगी।

मैनेजमेंट फंडा एन. रघुरामन

फंडा यह है कि... raghu@bhaskarnet.com

कौन कहता है कि हम ईमानदारी से अपना जीवन अच्छे-से नहीं बिता सकते। यदि आपने तय कर लिया है कि आप सच्चाई और ईमानदारी की राह पर चलेंगे, तो आगे के रास्ते आपके लिए अपने आप खुलते जाएंगे। यदि ऑटो ड्राइवर ऐसा कर सकते हैं, तो प्रबुद्ध-शिक्षित लोग तो ऐसा और भी बेहतर ढंग से कर सकते हैं।
 
 
 

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