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ईमानदारी से कमाएं बेहतर आजीविका
एन. रघुरामन
| Apr 05, 2012, 11:10AM IST

दरअसल 23 मार्च को मुंबई में तकरीबन 30 ऑटो ड्राइवरों ने सिम कार्ड सेल्समैन के तौर पर एक समानांतर कॅरियर शुरू किया है। इसके साथ ही 400 से ज्यादा 'ईमानदार' ऑटो वालों को मोबाइल टैरिफ प्लांस बेचने की ट्रेनिंग दी जा रही है, ताकि वे अपनी आमदनी बढ़ा सकें। ये ड्राइवर 'रिक्शावाले' नामक एक कंपनी के साथ जुड़े हैं, जो मुंबई महानगर की पहली डायल-एन-ऑटो सर्विस प्रोवाइडर कंपनी है। यह कंपनी इस बात का खास ख्याल रखती है कि उसके यहां पंजीकृत किसी भी ऑटो के मीटर में छेड़छाड़ न की गई हो। इसका दूसरा पहलू यह है कि ये ऑटो ड्राइवर अपने धांधलेबाज साथी चालकों के मुकाबले दिन में 200 रुपए तक कम कमा पाते हैं। और इस खाई को पाटने के लिए ईमानदार ऑटो ड्राइवरों ने अपनी आमदनी बढ़ाने का फैसला किया। उनके मन में पानी, कोल्ड ड्रिंक्स से लेकर ऐसी कई चीजों को बेचने का ख्याल आया, जिनकी सफर के दौरान मुसाफिरों को जरूरत पड़ती है।
आखिरकार उन्होंने सेलफोन सिम कार्ड बेचने का फैसला किया। फोन कंपनी उन्हें प्रति एक्टिवेशन ढाई सौ रुपए देती है। याद रखें कि जब वे हेर-फेर वाले मीटर के साथ ऑटो चलाते थे, तब रोज महज 200 रुपए अतिरिक्त कमाते थे। वैसे इन ड्राइवरों के लिए यह एक चुनौतीपूर्ण अनुभव है क्योंकि उन्हें इसके लिए अपने ऑटो में बैठे मुसाफिर से बातचीत करते हुए उसे एक नया सिम कार्ड या नया प्लान बेचना होता है। मैंने जिस ऑटोरिक्शा चालक से सिम कार्ड खरीदा था, यह उसकी पहली बिक्री थी। जब मैंने उसे बताया कि इस ऑटोरिक्शा के बिजनेस में उसकी ईमानदारी की वजह से ही मैं यह सिम कार्ड उससे खरीद रहा हूं, तो वह खुशी से उछल पड़ा।
आने वाले हफ्तों में ये ड्राइवर प्रीपेड मोबाइल कनेक्शनधारकों को टॉप अप प्लान भी बेचने लगेंगे। यहां तक कि 'चेंज की समस्या' को टॉप अप प्लांस के साथ सुलझाया जा सकता है। वे 'चेंज' न होने की सूरत में आपको टॉफी या चॉकलेट नहीं देंगे। लोग भी टॉफी के बदले अपने मोबाइल के लिए कोई टॉप अप प्लान लेने के लिए तैयार हो जाएंगे। वे रेलवे वालों से भी सब-अर्बन टिकट बुकलेट्ïस बेचने के बारे में बातचीत कर रहे हैं। ऐसा करने से रेलवे काउंटरों पर ज्यादा भीड़ भी जमा नहीं होगी।
मैनेजमेंट फंडा एन. रघुरामन
फंडा यह है कि... raghu@bhaskarnet.com
कौन कहता है कि हम ईमानदारी से अपना जीवन अच्छे-से नहीं बिता सकते। यदि आपने तय कर लिया है कि आप सच्चाई और ईमानदारी की राह पर चलेंगे, तो आगे के रास्ते आपके लिए अपने आप खुलते जाएंगे। यदि ऑटो ड्राइवर ऐसा कर सकते हैं, तो प्रबुद्ध-शिक्षित लोग तो ऐसा और भी बेहतर ढंग से कर सकते हैं।






