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अपने जीवन की नींव को दें मजबूत आधार

एन. रघुरामन | Apr 28, 2012, 12:40PM IST
 
 

यदि आपको विमान में किसी भी पंक्ति में 'बी' सीट मिले, तो उस विमान में कदम रखने से पहले आपके मन में हजार तरह के ख्याल आएंगे? दो हफ्ते पहले मैं भी कुछ इसी तरह की स्थिति में था। मेरी दाएं ओर की सीट पर एक 72 वर्षीय महिला बैठी थी और बाएं ओर एक सख्त सा दिखने वाला एक उच्चाधिकारी था, जिसकी उम्र तकरीबन 48-50 साल रही होगी। सीट पर बैठने के बाद मैंने दोनों का अभिवादन किया और संक्षिप्त परिचय के बाद मुझे लगा कि अच्छा ही हुआ जो मुझे यह सीट मिली, जिससे मुझे उनके साथ सफर करने का मौका तो मिला।

दायीं सीट पर विराजित महिला माधुरी थाथाचारी कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी की रिटायर्ड डाटा मैनेजर थीं। वह कर्नाटक के मैसूर में भ्रमर ट्रस्ट ऑफ वाईटी नामक एक ट्रस्ट चलाती हैं। वह प्राकृतिक आपदाओं में अपने परिजनों को खोने वाले लोगों की मदद करने के अलावा हर साल देश के उदीयमान वैज्ञानिकों द्वारा अपने संबंधित क्षेत्रों में किए गए अच्छे कार्र्यों की पहचान करते हुए उन्हें पुरस्कार देकर सम्मानित करती हैं। यह पुरस्कार उन्होंने अपने पति वाईटी थाथाचारी की स्मृति में शुरू किया है, जो प्रख्यात वैज्ञानिक थे। पुरस्कार के तहत युवा वैज्ञानिकों को एक लाख रुपए की नकद धनराशि दी जाती है। इसके साथ-साथ वह युवाओं को संगीत में बढ़ावा देने के लिए कर्नाटक संगीत प्रतिस्पद्र्धा (मुफ्ट एंट्री के साथ) भी आयोजित करती हैं। उन्होंने कर्नाटक संगीत की प्रख्यात गायिका एमएस सुब्बुलक्ष्मी के नाम पर भी एक पुरस्कार शुरू किया है।

वह मैसूर में एक पशु चिकित्सालय खोलने पर भी विचार कर रही हैं, ताकि आवारा घायल या बीमार कुत्तों व मवेशियों को इलाज मिल सके। माधुरी जरूरतमंद लोगों की मदद के लिए कहीं से फंड नहीं जुटातीं, वरन वह इस उद्देश्य के लिए अपनी आय का इस्तेमाल करती हैं। वे इंजीनियरिंग व नर्र्सिंग की पढ़ाई कर रहे जरूरतमंद छात्र/छात्राओं की फीस भरने के अलावा कैंसर व हृदयरोगियों की भी मदद करती हैं। वह ऐसा इसलिए कर पाती हैं क्योंकि विदेश में बस चुके उनके बच्चों का कहना है कि वे उनके लिए कुछ भी न बचाएं और बचत को अच्छे कामों में इस्तेमाल करें।

मेरे बाजू में दूसरी ओर बिहार के प्राथमिक शिक्षा विभाग के निदेशक आशुतोष बैठे थे, जिन्होंने दो दिनों में डेढ़ सौ से ज्यादा बर्खास्तगी पत्रों पर दस्तखत किए थे और तबसे ही वह दुखी थे। उनका यह दुख दूसरों को बर्खास्त करने के लिए नहीं, वरन इसलिए था कि शिक्षा के क्षेत्र में काबिल लोग नहीं मिल पा रहे हैं। उन्होंने उन शिक्षकों को नौकरी से निकाला था, जो कक्षा पांचवीं तक शिक्षण के लिए जरूरी कसौटी पर बुरी तरह नाकाम रहे थे। आशुतोष चिंतित थे कि इस तरह के शिक्षक बगैर किसी बुनियादी समझ के हमारी अगली पीढ़ी को कैसे तैयार कर पाएंगे।

इसके साथ ही उन्होंने विभिन्न जिलों में पदस्थ अपने कनिष्ठ अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे अगले पखवाड़े में कुछ निर्धारित मानदंडों की कसौटी पर तमाम टीचरों की परख करें और उन्हें यकीन है कि कई और शिक्षकों को अपनी नौकरी से हाथ धोना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि शिक्षा विभाग में सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की भर्ती के नियमों में इस तरह की कार्रवाई का प्रावधान है। उन्होंने ठान लिया है कि वह अगली पीढ़ी को अपनी ओर से हरसंभव बेहतरीन शिक्षकों की सेवाएं मुहैया कराएंगे। आखिरकार अगली पीढ़ी की बुनियाद बेहतर शिक्षा ही तो है।

मैनेजमेंट फंडा एन. रघुरामन

फंडा यह है कि... raghu@bhaskarnet.com

अच्छी शिक्षा ही इंसानी जीवन की सुदृढ़ नींव है। आस-पास नजर दौड़ाएं। आपको ऐसे हजारों उदाहरण मिल जाएंगे कि जिनकी यह नींव मजबूत रही है, उनकी जिंदगी में कभी अस्थिरता नहीं रही।
 
 
 

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