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आपमें है हर हालात को अनुकूल बनाने का हुनर?

एन. रघुरामन | Apr 30, 2012, 12:24PM IST
 
 

एक युवती ने अपनी मां के समक्ष अपने हालात का जिक्र करते हुए बताया कि वह जिंदगी में किस कदर समस्याओं से जूझ रही है। उसका कहना था कि जैसे-तैसे कोई एक समस्या निपटती है, तो दूसरी खड़ी हो जाती है। वह अपनी मां से जानना चाहती थी कि इससे कैसे निपटा जाए। मां उसे किचन में ले गई, जहां उन्होंने तीन पतीले लिए और उनमें पानी भर तेज आंच पर रख दिया। जल्द ही उनमें भरा पानी उबलने लगा। पहले पतीले में उन्होंने गाजर डालीं, दूसरे में अंडे और तीसरे में कॉफी बींस को डाला। इसके बाद मां ने इन्हें उबलने के लिए छोड़ दिया।

तकरीबन बीस मिनट के बाद उन्होंने सबसे पहले गाजरों को उबलते पानी से बाहर निकाला और एक बाउल में रख दिया। इसी तरह उन्होंने अंडों को बाहर निकालकर बाउल में रख दिया। आखिर में उन्होंने एक बड़ी चम्मच से कॉफी को बाहर निकाल उसे बाउल में उड़ेल दिया। इसके बाद मां अपनी बेटी से बोली, 'बताओ तुमने क्या देखा?' 'गाजर, अंडे और कॉफी', बेटी का जवाब था। इसके बाद उसकी मां ने करीब आकर गाजरों को छूकर देखने के लिए कहा। ऐसा करने पर बेटी ने पाया कि वे नरम हो गई हैं। इसके बाद उसकी मां से उससे अंडे को हाथ में लेकर इसे तोडऩे के लिए कहा। अंडे का छिलका निकालने के बाद उसने पाया कि इसके भीतर हिस्सा ठोस और पहले के मुकाबले सख्त हो गया है। आखिर में उसकी मां ने उससे कॉफी की एक चुस्की लेने के लिए कहा। युवती ने मुस्कराते हुए कॉफी की भीनी महक के साथ उसका स्वाद लिया। इसके बाद मां ने उसे समझाया कि इन तीनों चीजों को उबलते पानी के रूप में एक ही तरह की प्रतिकूलता का सामना करना पड़ा, लेकिन तीनों की प्रतिक्रिया एक-दूसरे से बिल्कुल जुदा रही।

गाजर उबलते पानी में डालते वक्त सख्त, मजबूत और कठोर थीं, लेकिन उसमें कुछ देर रहने के बाद वे नरम हो गईं। अंडा पहले बहुत नाजुक था। इसकी पतली बाहरी झिल्ली ने इसके भीतर के तरल को संभाला हुआ था, लेकिन खौलते पानी में डाले जाने के बाद इसके अंदर का भाग ठोस रूप में परिवर्तित हो गया। अलबत्ता कॉफी के बीजों का मामला अनूठा है। जब इन्हें खौलते पानी में डाला गया, तो इन्होंने उस पानी की प्रकृति ही बदल दी। इसके बाद मां ने अपनी बेटी से पूछा, 'तुम इनमें से किसकी तरह हो? जब कोई मुसीबत दरवाजे पर दस्तक देती है, तो तुम कैसे प्रतिक्रिया देती हो? गाजर की तरह, अंडे की तरह या फिर कॉफी बींस की तरह?' जरा इसके बारे में सोचो : आखिर मैं कौन हूं?

क्या मैं गाजर हूं, जो सख्त लगती है, लेकिन जरा-सी तकलीफ और मुसीबत झेलने के बाद कुम्हलाते हुए मेरी शक्ति क्षीण हो जाएगी? क्या मैं अंडा हूं, जिसका दिल शुरुआत में बहुत नरम होता है, लेकिन गर्मी पाने के साथ यह बदल जाता है? क्या मेरी प्रवृत्ति तरल की तरह थी, लेकिन कोई ठोकर, कोई बे्रक-अप, कोई आर्थिक मुसीबत या किसी अन्य तरह की आपदा के चलते मैं सख्त और निर्मम हो गया/गई? क्या मेरा आवरण पहले जैसा है, लेकिन अंदर से मैं शुष्क भावना और कठोर हृदय के साथ कटु और सख्त हो गया/गई हूं? या फिर मैं कॉफी बींस की तरह हूं, जो वास्तव में गरम पानी जैसे दर्दनाक हालात की प्रकृति को ही बदल देता है? जब पानी गरम होता है, तो इसकी महक और रंगत बिखेरने लगता है।

मैनेजमेंट फंडा एन. रघुरामन

फंडा यह है कि... raghu@bhaskarnet.com

जब हालात बेहद खराब हों तो आपमें बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए परिस्थिति को अपने अनुकूल बना लेने की क्षमता होनी चाहिए। आप प्रतिकूलताओं का सामना किस तरह करते हैं, आप खुद को किस श्रेणी में रखेंगे; गाजर की, अंडे की या फिर कॉफी के बीज की श्रेणी में?
 
 
 

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