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सेलिब्रिटी एंडोर्समेंट्ïस का लाभ उठाना सीखें

एन. रघुरामन | May 04, 2012, 10:13AM IST
 
 


बॉलीवुड अभिनेत्री माधुरी दीक्षित को प्रतिष्ठित मास्टर दीनानाथ विशेष पुरस्कार से सम्मानित किए जाने के एक हफ्ते बाद महाराष्टर सरकार ने इस पर नाराजगी जताई कि माधुरी इस प्रदेश का ब्रांड एंबेसडर बनने पर सहमत नहीं हुर्ईं। माधुरी ने इसके 21 दिन के शेड्यूल के लिए 10 करोड़ रुपयों की मांग की। सरकार उम्मीद कर रही थी कि वह सरकार का यह एंडोर्समेंट मुफ्त में कर देंगी। बहरहाल, इससे मुझे अमेरिका में 1996 के मध्य में 'अंडर आर्मर' कंपनी से जुड़ी सेलिब्रिटी एंडोर्समेंट की एक सफल केस स्टडी याद आ गई। इस कंपनी के प्रवर्तक केविन प्लांट खुद भी एक फुटबॉल खिलाड़ी थे। उन्हें खिलाडिय़ों की ऐसी टी-शट्ïर्स सख्त नापसंद थीं, जिनमें काफी पसीना आता था। लिहाजा उन्होंने ऐसी टी-शर्ट बनाने के बारे में सोचा, जो जबरदस्त पसीना आने के बाद भी हल्की बनी रहे। केविन ने अपनी इस कंपनी को 'अंडर आर्मर' नाम दिया और इस टाइप की टी-शर्ट की एक खेप तैयार करने के बाद परीक्षण के आधार पर वे इसे बेचने निकल पड़े।

ऐसा करने के लिए उन्होंने फुटबॉल खिलाडिय़ों के अपने नेटवर्क को चुना। उनके कई साथी उस वक्त विभिन्न नेशनल फुटबॉल लीग की टीमों के साथ खेल रहे थे, जो लगातार साल-दर-साल एक-दूसरे के साथ मुकाबला करते थे। केविन ने उनसे मैच के दौरान अपनी बनाई टी-शर्ट पहनने की गुजारिश करने के बजाय इतना कहा कि, 'मेरे पास यह साफ-सुथरा उत्पाद है और इस कूल कंपनी के साथ मैं काम करता हूं। तुम इसे आजमा सकते हो।' यदि वे इसमें दिलचस्पी जाहिर करते, तो केविन उससे कहते, 'मैं आपको दो-चार टी-शटर्स भेज दूंगा।' यह ग्रास-रूट एप्रोच थी। केविन का मानना था कि यदि उनकी बनाई टी-शटर्स के इस्तेमाल से इनके प्रदर्शन में थोड़ा-सा भी निखार आता है, तो उनकी कमाई बढ़ जाएगी। उन्होंने अपनी टी-शटर्स के लिए इन खिलाडिय़ों से अनुग्रह करने के बजाय इन्हें उनके लिए एक मददगार साधन के रूप में पेश किया।

उनका सोचना था कि जब टीम के कुछ सदस्य पसीना आने की सूरत में भी हल्कापन महसूस होने के बारे में दूसरों से चर्चा करेंगे, तो टीम का मैनेजर अपने सभी खिलाडिय़ों के लिए इनका ऑर्डर जरूर देगा। ठीक ऐसा ही हुआ। दिसंबर 1996 के अंत में जॉर्जिया स्टेट फुटबॉल टीम से उन्हें पहला ऑर्डर मिला और इसके तुरंत बाद अटलांटा फाल्कंस तथा न्यूयॉर्क जाइंटस की ओर से भी ऑर्डर आ गए। 1997 की गर्मियों में मियामी डॉल्फिंस के इक्विपमेंट मैनेजर ने केविन को बुलाया और उनसे अपने लड़कों के लिए 150 टी-शट्ïर्स मुफ्त भेजने के लिए कहा। केविन ने इससे इनकार करते हुए कहा कि उनका प्रमोशन बजट उन्हें 10 से ज्यादा मुफ्त टी-शटर्स बांटने की इजाजत नहीं देता।

लेकिन चौबीस-घंटे बाद इसी मैनेजर ने उन्हें टी-शटर्स की कीमतों पर बातचीत के लिए फोन किया, क्योंकि लड़के इस बात पर जोर दे रहे थे कि उन्हें ऐसी टी-शर्ट चाहिए, जिससे उनकी पसीने की समस्या दूर हो जाए। कुल मिलाकर माउथ पब्लिसिटी के जरिए ब्रांड निर्मित करने की यह रणनीति केविन के लिए अरबों डॉलर के कारोबार में तब्दील हो गई। चूंकि उनकी टी-शर्ट विभिन्न टीमों के खिलाड़ी इस्तेमाल करने लगे थे, लिहाजा जो भी टीम जीतती, कंपनी का सेल्स-ग्राफ बढ़ जाता।

मैनेजमेंट फंडा एन. रघुरामन

फंडा यह है कि...

यदि आप ऐसे उत्पादों का कारोबार करते हैं, जिनके लिए एंडोर्समेंट्ïस जरूरी हों, तो आपको स्पष्टï तौर पर यह तय करना होगा कि कब उत्पाद को मुफ्त में बांटना सार्थक होगा और कब आप अपने उत्पाद के लिए वाजिब दाम मांग सकते हैं। raghu@bhaskarnet.com

 
 
 

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